रामपुर। जिले में कोरोना से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान में 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों के लिए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष दोनों डोज का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। किशोर वर्ग की दो श्रेणियों में 15 से 17 आयु वर्ग में पहली डोज में 98 फीसदी और दूसरी डोज में 94 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। वहीं 12 से 14 साल आयु वर्ग में 96 फीसदी ने पहली और 81 फीसदी ने दूसरी डोज ले ली है। हालांकि, इस टीकाकरण को रफ्तार देने के लिए विशेषज्ञों ने काफी बढ़ा योगदान दिया है। विशेषज्ञों ने लोगों के मन की भ्रांतियों को दूर करने के साथ ही टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक किया।
जिले में टीकाकरण को ग्रामीण क्षेत्रो में तरह -तरह की भ्रांतियां और अफवाह फैली हुई थी। जिस कारण टीकाकरण अभियान की राह में रोड़ा बन रहा था। जिस कारण टीकाकरण की रफ्तार शुुरुआत में सुस्त रही। टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों के साथ धर्मगुरुओं का सहारा लिया गया। जिसका परिणाम रहा कि 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों के लिए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष दोनों डोज में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। किशोर वर्ग की दो श्रेणियों में 15 से 17 आयु वर्ग में पहली डोज में 98 फीसदी और दूसरी डोज में 94 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। वहीं 12 से 14 साल आयु वर्ग में 96 फीसदी ने पहली और 81 फीसदी ने दूसरी डोज ले ली है।
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कोरोना टीकाकरण को लेकर लोगों के मन में काफी भ्रांतियां थी। कई लोगों को था कि बुखार आ जाएगा। कई लोगों के मन में था कि टीकाकरण से कोरोना से संक्रमित हो जाएंगे। इन सभी तरह की भ्रांतियों को दूर करने के लिए हमारे टीमें गांव-गांव में गई और लोगों को जागरूक किया। इसके साथ ही धर्मगुरुओं का बहुत बढ़ा सहयोग लोगों की भ्रांतियों को दूर करने के लिए रहा है ।
- डॉ.एसपी सिंह, सीएमओ
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कोरोना कॉल में हमने अपनी टीम के साथ गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया। कोरोना वैक्सीन को लेकर जो भ्रांतियां थीं, वह दूर की गईं। मिलक अस्पताल में लगातार कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही हैं। तीसरी डोज भी लगाई जा रही हैं और हम आज भी लोगों से अपील करते हैं कि अधिक से अधिक संख्या में आकर इस गंभीर बीमारी के प्रति सचेत रहते हुए वैक्सीनेशन कराएं। - डॉ. पदम सिंह सीएचसी अधीक्षक मिलक
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कोरोना संक्रमण की पहली लहर शुरू हुई तो लोगों में बहुत ज्यादा डर बैठा हुआ था। जिले में पहला केस भी टांडा में ही मिला तो स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई। लेकिन, हमारी टीम लोगों तक पहुंची और जागरूक किया और बचने का रास्ता बताया। फिर जब टीका आया तो लोगों में अलग-अलग तरह की भ्रांति फैली हुई थीं। ऐसे में सीएचसी क्षेत्र के करीब डेढ़ सौ गांवों में खुद भ्रमण किया और ग्रामीणों को जागरूक किया। - डॉ. सतवीर सिंह, टांडा सीएचसी प्रभारी
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जिन गांवों में लोगों के मन में भ्रांतिंयां होती थी और टीकाकरण केंद्र पर लोग नहीं आते थे। वहां, हमारी टीम जब तक लोगों के मन का डर और भ्रांति दूर नहीं हो जाती थी, उन गांवों में लगातार जाकर जागरूक करती थी। - डॉ. केके चहल, प्रभारी शाहबाद सीएचसी