किशोरों में सहनशक्ति की कमी और किसी भी मामूली बात पर नागवार गुजरने के मामले सामने आने लगे हैं। नगर में मां-बाप की डांट से क्षुब्ध होकर किशोर ने फांसी लगाकर जान दे दी। किशोर की लाश को छत में लगे जाल से लटका देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सुबह बालक को सुपुर्दएख़ाक कर दिया गया।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोर वय में बच्चे शारीरिक के साथ ही मानसिक बदलाव से गुजरते हैं लिहाजा इस उम्र के बच्चों को डांटने-डपटने में खास सावधानी बरतनी चाहिए। इस उम्र के बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए।
घटना नगर के मोहल्ला बरगद की है। बताते ही कि असगर मियां के नाबालिग पुत्र मोहम्मद उजैफा (14) नगर के निजी विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र था। रविवार को शाम मोहल्ले के बच्चो संग खेलने के लिए गया था। इसके बाद देर शाम जब वह घर वापस लौटा तब उसके माता पिता ने खेलने जाने तथा कोई कार्य नहीं करने पर उसकी डाँट लगाई। जिससे गुस्सा होकर किशोर ने मकान के एक कमरे में घुस कर अंदर से लॉक लगा लिया। परिजनों ने सोचा कि किशोर गुस्से में है।देर रात ग्यारह बजे तक जब वो कमरे से बाहर नहीं आया तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने दरवाजे पर दस्तक दी लेकिन अंदर वह फंदे से झूलता पाया गया।