डिप्लोमा फार्मेसिस्टों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से मंगलवार को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। दवा काउंटरों पर ताले लटक गए। इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी गईं। मरीजों को अस्पताल में भर्ती भी नहीं किया गया। जिससे मरीजों में हाहाकार जैसी स्थिति रही। काउंटर के बाहर दवा मिलने का इंतजार करते रहे लेकिन उनको मायूसी ही हाथ लगी। जिसकी वजह से उनको निजी चिकित्सकों के यहां जाना पड़ा।
इधर, हड़ताल की वजह से पोस्टमार्टम भी नहीं हुए। कई घंटे तक लाशें पड़ी रहीं। बाद में जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद शवों का पोस्टमार्टम शुरू हुआ। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने प्रदेशव्यापी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन के बाद मंगलवार को हड़ताल शुरू कर दी। डिप्लोमा फार्मेसिस्ट धरने पर बैठ गए। हड़ताल के कारण सुबह से ही जिला अस्पताल और जिले भर की सीएचसी-पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवा, दवा वितरण काउंटर, पर्ची काटे जाने से लेकर स्टोर और लैब में भी काम ठप हो गया। इन हालात में मरीज कराह उठे। हंगामा होने लगा। दवाएं नहीं मिलने पर मरीजों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया। एडीएम प्रशासन मदन सिंह गर्ब्याल ने पहुंचकर लोगों को शांत किया। इसके बाद पोस्टमार्टम भी नहीं हुए। तीन शव पड़े रहे। दोपहर बाद एडीएम के समझाने पर मानवता के नाते फार्मासिस्टों ने पोस्टमार्टम कराने में मदद की।
सुबह से लेकर दोपहर बाद तक जिला अस्पताल में मरीजों को कराहते देखा गया। डाक्टरों की संख्या कम होने के कारण डाक्टर भी पूरी तरह मरीजों को नहीं संभाल सके। इधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डा आर के ढल ने बताया कि फार्मेसिस्टों की हड़ताल से परेशानी आ रही है। लेकिन मरीजों को मैनेज किया जा रहा है।