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दास्तान ए रियासत : रामपुर में आज भी कायम हैं रुहेला सरदारों के नाम पर बने मोहल्ले

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रामपुर। रामपुर रियासत के संस्थापक नवाब फैजुल्लाह खां ने जो बस्तियां आबाद की वह करीब पौने तीन सौ साल बाद भी उसी नाम से पहचान बनाए हुए हैं और कायम हैं। नवाब फैजुल्लाह खां ने अपनी रियासत में कई रूहेला सरदारों को लाकर बसाया था और उन्हें एक-एक प्लॉट आवंटित किया था। बाद में यह मोहल्ले उन रूहेला सरदारों के नाम से ही मशहूर हो गए और आज भी उसी नाम से जाने जाते हैं।
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रियासत काल के जानकार एडवोकेट शौकत अली खां अपनी पुस्तक रामपुर का इतिहास में जिक्र करते हैं कि रामपुर को साल 1775 में बसाया गया था। उस वक्त इस रियासत के संस्थापक और पहले शासक नवाब फैजुल्लाह खां ने सुरक्षा की दृष्टि से जहां शाहबाद से हटकर रामपुर नगर को बसाना शुरू किया तो उसी वक्त प्रमुख रूहेला सरदारों को भी रामपुर लाकर बसाया। नवाब फैजुल्लाह खां ने इन सभी रूहेला सरदारों और खानदानों को एक-एक प्लॉट आवंटित किया जो धीरे-धीरे मोहल्ले बने और इन मोहल्लों का नाम भी उन सरदारों के नाम पर ही पड़ गया जो आज तक कायम है।
शहर में मौजूद मोहल्ला घेर नज्जू खां, घेर अहमद शाह खां, घेर कलंदर खां, घेर सैफुद्ददीन खां, घेर अहमद खां पीपल वाला, चौक मोहम्मद सईद खां, मोहल्ला आफरीदियान, बाजोड़ी टोला, गूजर टोला, कटरा जलालुद्दीन समेत कई मोहल्ले आज से करीब पौने तीन सौ साल पहले रूहेला सरदारों और खानदानों के नाम पर आबाद होने शुरू हुए जो आज भी अपना वही नाम और पहचान कायम किए हुए हैं।
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