गेट पर इंतजार करते रहे सांसद
शनिवार को सांसद के आने की सूचना मिलने के बाद यूनिवर्सिटी गेट पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। वहां मौजूद जिम्मेदार लोगों और फोन पर किसी से बातचीत के बाद भी उन्हें यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान सांसद मुख्य गेट पर ही मौजूद रहे और स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करते रहे।
अखिलेश का पैगाम लेकर आए थे सांसद
करीब 30 मिनट तक इंतजार के बावजूद जब प्रवेश नहीं मिला तो सांसद वहां से लौट गए। उनके वापस जाने के बाद इस घटनाक्रम की चर्चा सपा ही नहीं अन्य दलों के बीच भी प्रमुखता से रही। हालांकि सांसद ने मीडिया से बातचीत में अपने और आजम परिवार के बीच की दूरी को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। कहा कि वह यूनिवर्सिटी के खिलाफ जारी आदेश के क्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का पैगाम लेकर आए थे। यूनिवर्सिटी सभी धर्मों के बच्चों की तालीम के लिए है। स्थापना से लेकर संचालन तक अगर कहीं कोई चूक हुई हो तो उसे सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए, ध्वस्तीकरण का आदेश गलत है।
आजम और नदवी परिवार के बीच दूरी कायम
शनिवार को सामने आई इस स्थिति को राजनीतिज्ञ सांसद और आजम खां परिवार के बीच शुरुआत से चली आ रही दूरी के रूप में देख रहे हैं। दरअसल लोकसभा चुनाव के दौरान कोर्ट से सजा के कारण आजम कानूनी तौर पर चुनाव मैदान में आ नहीं सकते थे। तब उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव को मुलायम परिवार के किसी सदस्य को रामपुर से उम्मीदवार बनाने की सिफारिश की थी। अखिलेश यादव ने दिल्ली की एक मस्जिद में इमामत करने वाले रामपुर जिले के मौलाना नदवी को सपा उम्मीदवार बनाया था और वह चुनाव जीत भी गए थे। इस जीत के बाद भी नदवी और आजम परिवार के बीच नजदीकी नहीं बन सकी थी। शनिवार की घटना ने दोनों के बीच अब भी दूरी कायम होने का इशारा दिया है।