रामपुर। भगवान शिव की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए सोमवार 20 जुलाई का दिन विशेष होगा। क्योंकि इस दिन सावन माह के तीसरे सोमवार के साथ ही सोमवती अमावस्या भी है। सोमवार को होने वाली सोमवती अमावस्या के सावन माह के सोमवार पर होने के कारण इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है।
भगवान शिव की आराधना को समर्पित सावन के पवित्र माह में सावन सोमवार और अमावस्या के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। लेकिन अमावस्या यदि सोमवार को हो यानी सोमवती अमावस्या हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस बार दशकों बाद सावन के तीसरे सोमवार को विशेष मुहूर्त में 20 जुलाई को सोमवती अमावस्या पड़ रही है। इस अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहते है। करीब बीस साल पहले ऐसा संयोग बना था।
पंडित नवनीत शर्मा बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार सोवमती अमावस्या के दिन भगवान शिव, पार्वती, गणेशजी और कार्तिकेय की पूजा की जाती है। सावन सोमवार और सावन की सोमवती अमावस्या को पूजा-पाठ करने और जलाभिषेक का विशेष फल प्राप्त होता है। बहुत से भक्त भगवान शिव की असीम कृपा पाने के लिए सोमवती अमावस्या को व्रत भी रखते हैं। अमावस्या को महिलाएं तुलसी/पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा भी करती हैं। कई इलाकों पर अमावस्या के दिन पितर देवताओं की पूजा करने और श्राद्ध करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे अज्ञात तिथि पर स्वर्गलोकवासी हुए पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण लागू पाबंदियों के चलते श्रद्धालुओं को घरों में ही पूजा करनी होगी। मंदिरों पर पुलिस की निगरानी होगी। पंडित नवनीत शर्मा ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वह घरों में ही पूजा कर जलाभिषेक करें, मंदिरों में भीड़ न लगाएं।