आश्विन शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा की तिथि की वृद्धि और दशमी तिथि के क्षय के कारण रविवार को भी पंचम नवरात्र का योग रहा। इस कारण भक्तों ने रविवार को भी मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही कई श्रद्धालुओं ने रविवार को मां के छठे रूप मां कात्यायिनी की पूजा-अर्चना की।
मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की भीड़ रही, महिलाओं ने माता के छंद गाए और पिन्नी का आयोजन भी किया। शारदीय नवरात्र में रविवार को भी पांचवीं तिथि का योग रहा। माता के पांचवें रूप स्कंदमाता की भी पूजा हुई। सुबह-शाम मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही, भक्तों ने शंख, घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां के जयकारे लगाते हुए मां की पूजा-अर्चना की।
भक्तों ने नारियल, पुष्प, कपूर, फल, लौंग, मखाने आदि से माता की विधिवत पूजा कर सर्वमंगल की कामना की। पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र में आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की तिथि में वृद्धि है, जबकि दशमी तिथि का क्षय है। इस कारण रविवार को भी पंचमी योग होने के कारण पंचम स्कंदमाता का ही पूजन हुआ है।
मां का यह स्वरूप शक्ति का द्योतक है। स्कंदमाता की उपासना से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। शहर के प्राचीन श्री दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, माई का थान, पीडब्ल्यूडी कालोनी स्थित मंदिर, नर्मदेश्वर मंदिर, जिला पंचायत रोड स्थित शिव मंदिर, मनोकामना मंदिर, हरिहर मंदिर, ज्वाला जी दरबार मंदिर समेत समस्त मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की चहल-पहल रही। महिलाओं ने रविवार को भी कई स्थानों पर पिन्नी का आयोजन किया।
स्वार में नवरात्र के पांचवें दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। दोपहर में गीता मंदिर, सैनी मोहल्ला देवियों के थान, बड़ा शिव मंदिर, संतोषी माता मंदिर, चमुंडा देवी मंदिर में महिलाओं की ओर से भजन कीर्तन का आयोजन किया गया।