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.शब ए बरात की रात हुई इबादत, दिन में रखे गए रोजे

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स्वार (रामपुर)। शुक्रवार को शब-ए बरात मनाई गई। इबादत के लिए मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोग उमड़ पड़े। रात भर कलाम पाक की तिलावत और नफिल नमाज का सिलसिला चला। लोगों ने अपने गुनाहों की माफी के साथ खुशहाली की दुआएं मांगी। शनिवार को बहुत से लोगों ने रोजे भी रखे।
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हदीसों में शब-ए बरात की इबादत को बड़ी फजीलत वाली रात कहा गया है। यह रात इस्लामी कलेंडर के माह शाबान उल मुअज्जम की 15 वीं शब-ए रात मनाई गई। शुक्रवार को जब यह रात आई तो मुसलमान रातभर जागे। उन्होंने घर और मस्जिदों में अल्लाह की इबादत की। इस दौरान कुरान शरीफ की तिलावत की गई। मुसलमानों ने कब्रिस्तान पहुंचकर अपने पूर्वजों की मगफिरत के लिए दुआएं कीं। अपने लिए गुनाहों को माफ करने की दुआएं भी की गईं। इससे पूर्व, शुक्रवार को जुमे की नमाजों के बाद उलमा ने शब-ए बरात की फजीलत बयान की।
जुमे की नमाज के पूर्व तकरीर में पेश इमाम मौलाना मोहम्मद शमीम ने कहा कि अल्लाह ने शाबान का महीना दिया है, जिसमें शब-ए बरात आती है, जो बहुत ही फजीलत वाली रात है, जिसकी इबादत में गुनाहों से माफी तलब होती है और अल्लाह उसे कुबूल फरमाता है।
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मौलवी फराग अहमद नईमी ने बताया कि इसी रात अल्लाह की इबादत करने का बहुत सवाब है। गुनाहों से निजात मिलती है इस लिए इस रात को किसी भी तरह जाया न करें। मौलवी फराग अहमद नईमी ने बताया कि इस रात नमाज और तिलावत कलाम पाक का एहतमाम अधिक से अधिक करनी चाहिए और जिंदगी में पांच समय की नमाज को नहीं छोड़ना चाहिए। हाफिज जमील अहमद ने कहा कि कुफ्र और ईमान के बीच का फर्क नमाज है। इसके अलावा मां -बाप की सेवा, मानव मूल्यों के अन्य आचरण जो कि कुरान हदीस में बयान किए गए हैं, उन्हें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है।
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