सपा नेता आजम खां के रामपुर पब्लिक स्कूल (गर्ल्स विंग) में पढ़ने वाली छात्राओं के भविष्य पर संकट के बादल हैं। स्कूल बंद होने के बाद से शिक्षा विभाग इनको अन्य स्कूलों में दाखिला दिलाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन की फीस से लेकर बीच सत्र में उनकी पढ़ाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए अभिभावक असमंजस में है।
इसीलिए एक भी अभिभावक की ओर से अभी तक छात्राओं की टीसी (स्थानांतरण प्रमाणपत्र) के लिए आवेदन नहीं किया गया है। सपा नेता आजम खां के जौहर ट्रस्ट की ओर से शिक्षा विभाग की जमीन पर संचालित रामपुर पब्लिक स्कूल पर अब ताला जड़ा जा चुका है। इस बिल्डिंग को माध्यमिक शिक्षा विभाग अपने हाथों ले चुका है।
इसके बाद से इसमें पढ़ने वाली कक्षा एक से आठ तक की 565 छात्राओं के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नोटिस जारी किए जाने के बाद अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सत्र पूरा होने तक स्कूल संचालन की अनुमति दिए जाने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने 10 नवंबर को इस स्कूल को बंद करा दिया था।
अब बेसिक शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को शहर के किसी भी स्कूल में बच्चों का दाखिला कराने की छूट दी है। इसके लिए विभाग में स्थापित हुए कंट्रोल रूम पर अभिभावकों से राय मांगी जा रही है। मगर अब तक जो नतीजे सामने आए हैं, उससे तो यही स्पष्ट है कि अभिभावक अपने बच्चों का अन्य स्कूलों में दाखिला नहीं कराना चाहते हैं।
इसके पीछे की वजह स्कूल की फीस, कॉपी, किताबों, ड्रेस आदि का खर्च है। साथ ही बीच सत्र में नए स्कूल में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, इसको लेकर भी सवाल है। रामपुर पब्लिक स्कूल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। ट्रस्ट के संचालन की वजह से इसमें बच्चों की फीस अधिक नहीं थी।
मगर शहर के अन्य सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में पढ़ाई का खर्च महंगा है। शायद इसी वजह से बच्चों के दाखिले को लेकर अभिभावक आगे नहीं आ रहे हैं। इसलिए उन्होंने अब तक रामपुर पब्लिक स्कूल के प्रबंधन के पास बच्चों की टीसी के लिए आवेदन भी नहीं किया है।
किसी भी बच्चे के अभिभावक ने स्थानांतरण प्रमाण पत्र के लिए आवेदन नहीं किया है। अगर वो आवेदन करते हैं तो स्थानांतरण प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
अजरा नाज खान, प्रधानाचार्य,रामपुर पब्लिक स्कूल।