रामपुर। सपा सरकार में राजकीय आईटीआई रामपुर में तैनात सांसद आजम खां के करीबी प्राचार्य जगदीश सिंह पर रामपुर तैनाती के दौरान किए गए सरकारी धन के गबन की जांच में दोषी पाए जाने पर उनके वेतन से 12 लाख की रिकवरी की जाएगी। रामपुर तैनाती के दौरान बिलासपुर राजकीय आईटीआई की शिफ्टिंग में किया था। आरोप है कि तब सरकारी धन का गबन हुआ था। इस संबंध में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रांत संयोजक फैसल मुमताज की शिकायत की थी, जिसके बाद शासन ने जांच के आदेश दिए थे। प्रिंसिपल वर्तमान में लखनऊ कार्यालय से संबद्ध हैं।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रांत संयोजक फैसल मुमताज ने पूर्व राजकीय आईटीआई प्राचार्य जगदीश सिंह पर सरकारी धन के गबन का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, राज्यपाल, विभागीय मंत्री से की थी। उनका आरोप था कि बिलासपुर आईटीआई में शिफ्टिंग के दौरान विभागीय ट्रक होने के बाद भी वित्तीय नियमों एवं टेंडर प्रकिया को न अपनाते हुए पूर्व मंत्री आजम खां के करीबी जगदीश सिंह ने प्राइवेट संस्था से ढुलाई का कार्य अनियमित ढंग से कराया गया। ढुलाई के कार्य के लिए 12 लाख एक हजार पांच सौ रुपयों का भुगतान प्राइवेट संस्था को किया गया, जो ढुलाई कार्य के लिए नहीं था। शिकायतों के बाद सरकार ने जगदीश सिंह को मुख्यालय से अटैच कर दिया था। शासन, प्रशासन एवं विभाग द्वारा जांच कराई गई। जिलाधिकारी रामपुर, मुख्य विकास अधिकारी रामपुर, प्रमुख सचिव व्यवसायिक शिक्षा लखनऊ, जिला विद्यालय निरीक्षक रामपुर, बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपुर, संयुक्त निदेशक मुरादाबाद मंडल एवं बरेली मंडल द्वारा जांच की गई, जिसमें शिकायत सही पाई गई तथा जगजीश सिंह को वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया। उनके विरुद्ध शासकीय धनराशि 12 लाख के गबन के आरोप भी सिद्ध हो गए, जिस पर विभाग द्वारा कार्रवाई के लिए लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश प्रयागराज से सहमति मांगी गई। नौ फरवरी को सहमति प्राप्त हुई, जिसके बाद लोक सेवा आयोग द्वारा प्रस्तावित दंड पर सहमति व्यक्त की गई। लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश प्रयागराज की सहमति पर तत्कालीन प्राचार्य जगदीश सिंह की दो वेतन वृद्धि पर तत्काल प्रभाव के साथ स्थायी रूप से रोकने, सरकारी धन के गबन की गई राशि 12 लाख को उनके वेतन से कटौती कर वसूली करने, परिनिंदा प्रविष्टि प्रदान करने की संस्तुति की गई।