रामपुर। रामपुरी चाकू और वायलिन की खासियत से सिर्फ देश के ही नहीं बल्कि विदेशों में बैठे कद्रदान भी रूबरू होंगे। इसके लिए रामपुरी चाकू और वायलिन को देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं की सूची में डालने की योजना तैयार कर ली गई है। इस आशय का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। मुख्य सचिव भी इसको लेकर चर्चा कर चुके हैं। जल्द ही रामपुर के चाकू और वायलिन उद्योग के दिन बहुरने की उम्मीद है।
कभी रामपुरी चाकू के साथ-साथ यहां की वायलिन देश प्रदेश में प्रसिद्ध थी। लेकिन संरक्षण के अभाव में यह उद्योग यहां दम तोड़ने लगा। चाकू उद्योग तो समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया था। लगभग दो साल पहले रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने चाकू, वायलिन के साथ-साथ रामपुर के परंपरागत उद्योग की सुध ली। यहां के परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इनसे जुड़े लोगों को प्रशिक्षण के साथ-साथ उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रशासन ने रूपरेखा तैयार कराई। मुख्यमंत्री को इस योजना से अवगत कराया, जिसकी उन्होंने सराहना की।
जिला प्रशासन ने शासन को जो प्रस्ताव भेजा है उसमें चाकू को लेकर जो कानून है उसमें रियायत देने की बात कही गई है। कहा गया है कि चाकू रखने वाले और इसे बनाने वाले के लिए अलग-अलग कानून होना चाहिए। साथ यह प्रस्ताव भी दिया है कि वायलिन के निर्यात पर लगने वाले जीएसटी की दर को कम किया जाए। इस पर उतना ही जीएसटी लगाया जाए जितना घरेलू वाद्य यंत्रों पर लगता है।
चाकू और वायलिन को प्रमोट करने की योजना बनाने वाले रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह अब मंडलायुक्त हैं। वो अभी भी इस योजना को अमलीजामा पहनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चाकू पर ऐसी डिजाइनिग के प्रयास किए जा रहे हैं जो रामपुर की सकारात्मकता और विरासत को आत्मसात करती हो। वायलिन इस तरह से तैयार करवाया जाएगा कि इसका उपयोग वाद्ययंत्र के रूप में करने के साथ ही लोग अपने ड्राइंग रूम में इसे जगह दे सकें। उन्होंने बताया कि रामपुर के परंपरागत उद्योगों के उत्पादों से लगभग 100 करोड़ का निर्यात किया जा सकता है। यहां बहुत संभावनाएं हैं। शासन स्तर रामपुरी चाकू और वायलिन के निर्यात को बढ़ाव दिए जाने की कोशिश की जा रही है।