सपा नेता आजम खां को कोर्ट ने बृहस्पतिवार को बड़ी राहत दी। डूंगरपुर प्रकरण के एक मामले में घर में घुसकर मारपीट, डकैती और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में बृहस्पतिवार को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आजम खां, पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर खां समेत आठ आरोपियों को बरी कर दिया।
घेर मियां खां निवासी शफीक बानो ने 25 जुलाई 2019 को गंज थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि तीन फरवरी 2016 को रात लगभग आठ बजे पूर्व चेयरमैन अजहर खां, तत्कालीन सीओ सिटी आले हसन, रानू खां, ओमेंद्र सिंह चौहान, फिरोज खां, जिबरान खां, ठेकेदार बरकत अली और 20-25 अज्ञात पुलिस कर्मी बस्ती में आए।
उनके मकान में जबरन घुस गए और धमकाते हुए परिवार को घर से निकाल दिया। साथ ही नौ हजार रुपये की नकदी लूट ली। आरोप है कि मकान पर बुलडोजर भी चलवाया। इस मामले में सपा नेता आजम खां को आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोपी बनाया था।
डूंगरपुर के एक मामले में सपा नेता आजम खां को सात साल की कैद व आठ लाख रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई जा चुकी है। यह सजा कोर्ट ने 18 मार्च को सुनाई थी। इससे पहले 31 जनवरी को इसी तरह के एक मामले में वे बरी भी हो चुके हैं।
बृहस्पतिवार को भी डूंगरपुर एक मामले में सपा नेता बरी हो चुके हैं। इस तरह डूंगरपुर के दो मामलों में सपा नेता बरी हो चुके हैं। डूंगरपुर के नौ मामले अभी भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। हालांकि, बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में सात साल की सजा मिलने के बाद से आजम खां सीतापुर जेल में बंद हैं। इसी मामले में उनके बेटे अब्दुल्ला आजम हरदोई जेल में और पत्नी डॉ. तजीन फातमा रामपुर जेल में हैं।
डूंगरपुर के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला 28 पेजों में सुनाया, जिसमें अभियोजन की ओर से शफीक बानो समेत 15 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। बचाव पक्ष की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य और हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग पेश की गई। कोर्ट ने शफीक बानो और गवाह करामत अली के बयानों का भी जिक्र किया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को सामान्य आशय से अपराध करने का भी जिक्र किया और सभी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
इस मामले में वादी शफीक बानो ने कोर्ट में पेश होकर पूर्व में दिए गए बयानों का समर्थन नहीं किया। उसने घटना होने से ही इन्कार कर दिया और पुलिस की कहानी का समर्थन नहीं किया। कोर्ट द्वारा उसे पक्षद्रोही घोषित किया गया।
इसी तरह गवाह करामत अली ने भी घटना की पुष्टि नहीं की, जिस पर कोर्ट ने उसे भी पक्षद्रोही घोषित कर दिया। इस प्रकार अभियोजन की ओर से पेश किए गए गवाहों ने घटना का समर्थन नहीं किया और अपने बयानों से मुकर गए। जिससे सभी आरोपी बरी हो गए।
रामपुर। डूंगरपुर के एक अन्य मामले में भी बृहस्पतिवार को बहस हुई। इस दौरान बचाव पक्ष की ओर से बहस की गई, लेकिन पूरी नहीं हो पाई। इस मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट ने 27 मार्च की तारीख तय की है। इस मामले में सपा नेता आजम खां को आपराधिक षड्यंत्र का आरोपी बनाया गया है।