परीक्षाओं के बीच शुरू हुए रामपुर महोत्सव की सफलता पर ही अब सवाल खड़े होने लगे हैं। कार्यक्रमों के संयोजक व प्रायोजक बनाने में किस तरह लापरवाही बरती गई है उसका जीता जागता उदाहरण सामने आया है,जिस कवि का निधन कई साल पहले हो चुका है उनको ही प्रशासन ने कवि सम्मेलन कराने की जिम्मेदारी सौंप दी है। यानी प्रशासन किस तरह आंख बंद कर काम कर रहा है इसको लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
परीक्षाओं के त्योहार में प्रशासन ने रामपुर महोत्सव की शुरुआत की है। 27 मार्च से इसकी शुरुआत हो चुकी है। आधी अधूरी तैयारियों के बीच रामपुर महोत्सव शुरू किया गया है। रामपुर महोत्सव के दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है। 26 अप्रैल तक चलने वाले इस कार्यक्रम को लेकर कई तैयारियां की हैं। हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम होने हैं। प्रशासन की ओर से प्रत्येक कार्यक्रम के संयोजक व प्रायोजक तैनात किए गए हैं।
तय कार्यक्रम के मुताबिक 22 अप्रैल को कवि सम्मेलन होना है। इसका संयोजक भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री सूर्य प्रकाश पाल के साथ ही शहर के वरिष्ठ कवि एवं शिक्षक रहे छोटे लाल शर्मा नागेंद्र को बनाया गया है। संयोजक बनाने में कितनी लापरवाही हुई है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छोटे लाल शर्मा नागेंद्र का निधन अब से कई साल पहले ही हो चुका है। नागेंद्र शहर के जैन इंटर कालेज में शिक्षक भी थे।
उनके निधन के बाद साहित्य जगत में शोक छा गया था। प्रशासन की इस लापरवाही से साहित्य जगत में आक्रोश है। इसके अलावा नुमाइश के बाबू को ही म्यूजिकल नाइट का संयोजक बनाया है। लोग इसे लापरवाही बता रहे हैं।