राज्यरानी एक्सप्रेस हादसे में जीआरपी की जांच रेलवे अफसरों की हीलाहवाली के आगे दम तोड़ती नजर आ रही है। रेलवे अफसरों ने जीआरपी के नोटिस पर बयान दर्ज कराने के लिए मुरादाबाद जाने से इंकार कर दिया है। जिससे जीआरपी द्वारा हादसे से जुड़े जिन बिन्दुओं पर जांच की जानी थी उन पर कोई जानकारी हासिल नहीं हो पा रही है।
राज्यरानी एक्सप्रेस हादसे के बाद जीआरपी द्वारा अज्ञात रेलवे कर्मियों व अफसरों के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया था। जिसमें जीआरपी द्वारा रेलवे कर्मियों व अफसरों की लापरवाही को हादसे की वजह बताया गया था। हादसे की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मंगलवार से बयान दर्ज किए जाने थे लेकिन, कोई भी रेलवे कर्मी या अफसर बयान दर्ज कराने एसपी जीआरपी के कार्यालय पर नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं रामपुर में 4 रेलवे अफसरों स्टेशन अधीक्षक आरडी मीणा, -रेल पथ निरीक्षक (पीडब्लूआई) एमके भार्गव, स्टेशन मास्टर संजीव सक्सेना, एसएसई (सीनियर सेक्शन इंजीनियर) आरके शर्मा को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था लेकिन, इन्होंने भी इंकार कर दिया।
कुछ ने तो बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस तक रिसीव नहीं किया। जीआरपी अफसरों का कहना है कि हादसे की जांच में रेलवे अफसरों द्वारा सहयोग नहीं किया जा रहा है। जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। रेलवे अफसरों का कहना है कि वह रामपुर में ही बयान देंगे और वो भी तब जब उनके उच्च अधिकारी इसके लिए कहेंगे। जीआरपी एसओ का कहना है कि जब तक रेलवे अफसर बयान दर्ज नहीं कराते तब तक यह पता नहीं चल सकेगा की हादसे वाले स्थान पर रेलवे ट्रैक कितना पुराना था, कितनी बार उसकी मरम्मत हो चुकी थी और इसके साथ ही अन्य बिन्दुओं पर भी जानकारी नहीं मिल सकेगी।