रामपुर। जौहर ट्रस्ट को चंदा देने के मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के रडार पर कई अफसर आ गए हैं, जिन्होंने जौहर ट्रस्ट को चंदा दिलाने में मदद की है। ईडी की ओर से ऐसे अधिकारियों को चिह्नित कर उन अफसरों और उनके परिजनों के बैंक खातों पर नजर रखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो ईडी को आशंका है कि सत्ता पक्ष और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री आजम खां के करीबी बनने के लिए कई पुलिस, प्रशासनिक और अन्य विभागों के अधिकारियों ने भी चंदा जुटाने में मदद की है।
सीतापुर जेल में बंद सांसद आजम खां के खिलाफ ईडी ने मनी लांड्रिंग का केस दर्ज करने के बाद मामले की जांच तेजी से शुरू कर दी है। इस मामले में भाजपा नेता आकाश सक्सेना हनी ने शिकायत की थी। उनका आरोप था कि सांसद आजम खां ने 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद 560 एकड़ भूमि में जौहर विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इसमें नियमों व कानून को ताख पर रखकर बहुत बड़ी मात्रा में सरकारी धन का दुरुपयोग व सरकारी जमीनों एवं गरीब किसानों एवं अनुसूचित जाति के लोगों की जमीनों को जबरन अपने नाम करवा कर उस पर भवन निर्माण कराना शुरू कर दिया। आरोप था कि आजम खां ने अपने ठेकेदारों, उद्योगपतियों से करोड़ों रुपये चंदे के रूप में लेकर काले धन को सफेद करने की भी कोशिश की थी। भाजपा नेता का आरोप था कि जिन-जिन लोगों से चंदा लिया गया है, उनमें से सैकड़ों लोगों को यह भी नहीं पता कि उनके नाम की रसीदें काट दी गई हैं तो कई लोगों के तो आयकर विभाग में रिटर्न तक दाखिल नहीं किए गए हैं। ऐसे चंदा देने वालो में रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल समेत प्रदेश के बाकी जिलों के लोग शामिल हैं। इस मामले में ईडी ने केस भी दर्ज कर लिया था, जिसके बाद ईडी ने बीस लोगों को नोटिस जारी लखनऊ में तलब में भी किया था और जवाब देने के लिए कहा था।
वहीं, ईडी की जांच का दायरा और बढ़ गया है। सूत्रों की मानें तो ईडी को जानकारी मिली है कि जौहर ट्रस्ट को चंदा दिलाने के मामले में कुछ अफसर भी मददगार रहे हैं, जो सपा सरकार के समय रामपुर में तैनात थे। इनमें पुलिस विभाग, प्रशासनिक, जलनिगम, सीएंडडीएस, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग समेत कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं। हालांकि, प्रशासनिक अफसर इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।