दुनिया भर में मशहूर रजा लाइब्रेरी मुस्लिम देशों से रिश्तों की मजबूती में एक बड़ा माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां भी मुस्लिम देशों में जा रहे हैं लाइब्रेरी की दुर्लभ पांडुलिपि वहां के शासकों को उपहार के तौर पर जरूर सौंपते हैं।
पिछले माह ईरान में वहां के सर्वोच्च नेता सैयद अली खमनेई को उन्होंने हजरत अली के हाथों लिखी गई दुर्लभ कुरान की प्रति भेंट की तो वहां के राष्ट्रपति हसन रुहानी को 1715 में फारसी में अनुवादित सुमेर चंद की रामायण उपहार स्वरूप दी। इससे पूर्व वह मंगोलिया में वहां के राष्ट्रपति साखिगिन इलबेडोर्ज को मंगोलों के इतिहास पर लिखी 'जामिउत तवारीख' की दुर्लभ पांडुलिपि भेंट कर चुके हैं। इससे पूर्व भी देश के प्रधानमंत्री मुस्लिम देशों से रिश्तों की मजबूती में रजा लाइब्रेरी की पांडुलिपियों को उपहार स्वरूप देते रहे हैं।
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प्रधानमंत्री कार्यालय से हर समय किसी ने किसी दुर्लभ पांडुलिपि की प्रतिलिपि की डिमांड होती रहती है। प्रधानमंत्री इन पांडुलिपियों की प्रतिलिपियों को मुस्लिम देशों के शासकों को स्वयं भेंट करते हैं।
दुर्लभ संग्रह को देखकर मुस्लिम शासक भी उसे हिफाजत से रखते हैं। पिछले वर्ष 17 मई 2015 को नरेंद्र मोदी जब मंगोल यात्रा पर गए तो वहां के राष्ट्रपति को साखिगिन इलबेडोर्ज को मंगोलों के इतिहास पर लिखी जामिउत तवारीख की दुर्लभ पांडुलिपि भेंट की। 13वीं सदी के मंगोलों के इतिहास पर इसमें महत्वपूर्ण जानकारी है। यह पांडुलिपि इलखानेत राजा गजन खान (1295-1304) में से एक है। इसमें ओलजीतजू (1304-1316) तक का इतिहास फारसी में लिपिबद्ध है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी यहां की प्रतियां भेंट की थीं।
पिछले महीने 24 मई को प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान ईरान में वहां के सर्वोच्च नेता सैयद अली खमनेई को उन्होंने हजरत अली के हाथों सातवीं सदी में लिखी गई दुर्लभ कुरान की प्रति भेंट की। हजरत अली की हस्तलिखित कुरान मजीद दुर्लभ पांडुलिपि है। उन्होंने वहां के राष्ट्रपति हसन रुहानी को 1715 में फारसी में अनुवादित सुमेर चंद की रामायण उपहार स्वरूप दी। यह दुर्लभ पांडुलिपियां रजा लाइब्रेरी के अतिरिक्त कहीं मौजूद नहीं हैं।