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उलमाओं का विरोध स्थगित, बेकसूरों की रिहाई का इंतजार

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रामपुर। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में 21 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार बेकसूर लोगों को रिहा करने और अन्य मांगों को लेकर उलमा ने प्रस्तावित विरोध को स्थगित कर दिया है। उलमा ने यह निर्णय पुलिस-प्रशासन द्वारा 26 लोगों से संगीन धाराओं को कम करने के बाद लिया है। हालांकि अभी भी उलमा ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्टि नहीं जताई है लेकिन, बेकसूर लोगों की रिहाई तक कोई विरोध प्रदर्शन न कर इंतजार करने का निर्णय लिया है।
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शुक्रवार 24 जनवरी को जामा मस्जिद में उलमा ने एक प्रस्ताव पढ़कर सुनाया और उसकी एक प्रति पुलिस-प्रशासन को भी भेजी थी। जिसमें 21 दिसंबर को हुई हिंसा के मामले में दर्ज किए गए मुकदमों से लेकर बेकसूरों की रिहाई आदि को लेकर पांच मांगों को शामिल किया गया था। ऐसा न होने पर 30 जनवरी को राय-मशविरे के बाद संवैधानिक विरोध का एलान किया था लेकिन, इससे पहले ही पुलिस-प्रशासन ने मामले में गिरफ्तार किए गए या शामिल किए गए 26 लोगों से आईपीसी की धारा 302, 307 समेत कई अन्य गंभीर धाराओं को हटा दिया। इसके बाद बुधवार को जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदस्यों व उलमा की बैठक के बाद 30 जनवरी से प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया है।
जामा मस्जिद में हुई बैठक के बाद जारी किए गए प्रेसनोट में कहा गया कि पुलिस-प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब बेकसूरों की रिहाई के लिए इंतजार किया जाएगा। हालांकि फैज के हत्यारे का खुलासा और कार्रवाई न करने समेत कई बिन्दुओं को लेकर उलमा ने असंतोष भी जताया है। प्रेस नोट पर शहर इमाम मुफ्ती महबूब अली, सैयद अहमद अली, फरहत अहमद जमाली, मौलाना असलम जावेद कासमी, मौलाना अंसार अहमद के नाम शामिल हैं।
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