फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टकराव के डर से पानी पर पहरा

Thu, 14 Apr 2016 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड के जलाशयों में पानी का टोटा हो गया। फसलों की सिंचाई के लिए पानी की डिमांड भी बढ़ रही है। ऐेसी स्थिति में नहरों में पानी छोड़ा गया तो किसानों में टकराव की स्थिति पैदा जाएगी। सिंचाई विभाग ने अभी से नहरों पर पहरा बैठा दिया है। चेतावनी जारी की है कि पानी रोकने वालों के खिलाफ रिपोर्ट कराई जाएगी। जिले में 347981 हेक्टेअर क्षेत्रफल सिंचित है। सिंचाई के लिए 362 सरकारी नलकूप और 93 नहरें हैं।
विज्ञापन


अधिकतर नलकूप खराब रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त बिजली भी नहीं मिल रही है। ऐसे में अधिकतर क्षेत्रफल की सिंचाई नहरों के भरोसे है। नहरों में उत्तराखंड के बौैर जलाशय, हरिपुरा और तुमड़िया जलाशय से पानी छोड़ा जाता है। इस वक्त जलाशयों में पानी का टोटा हो गया है। इसलिए इक्का दुक्का नहरों में ही पानी छोड़ा गया है। फसलों की सिंचाई के लिए किसान सभी  नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं।

सिंचाई बंधु की बैठक में भी नहरों में पानी छोड़ जाने का मुद्दा उठाया गया था। नहर विभाग को आशंका है कि नहरों में पानी आते ही किसानों में टकराव पैदा हो जाएगा। चूंकि असरदार किसान पानी रोक देते हैं। लिहाजा सिंचाई विभाग ने नहरों पर पहरा बैठा दिया है। अधिशासी अभियंता ने सभी अवर अभियंता, सींचपाल और सींच पर्यवेक्षकों को गश्त करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन


नहरों की कटिंग करने और कमजोर किसानों का पानी रोकने वालों की भी सूची बनाने का फरमान जारी किया गया है। साथ ही पानी रोकने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की है। अधिशासी अभियंता (नहर) वीके अग्रवाल ने कहा ‌कि उत्तराखंड के पानी में 45 प्रतिशत यूपी का शेयर है। फसलों की सिंचाई के लिए इस वक्त पानी की डिमांड बढ़ गई। बौर जलाशयों में पानी का टोटा है।   ऐसी स्थिति में कम नहरों को ही पानी मिल सकेगा। अगर पानी छोड़ा गया तो किसानों में टकराव पैदा हो सकता है। इसलिए अभी से गश्त कराई जा रही है। ताकि, कमजोर और छोटे किसानों को भी फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिल सके। 
विज्ञापन

,          
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें