रामपुर। नवाब रजा अली खां के इंतकाल के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया था। नवाब के बड़े बेटे मुर्तजा अली खां संपत्ति पर काबिज हो गए थे। इसके विरोध में उनके छोटे भाई और बहनों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी नवाब के सभी वारिसान को हिस्सेदार मानते हुए बंटवारा शुरू करा दिया है। कोर्ट का यही आदेश उस पक्ष के लिए दिक्कत पैदा कर सकता है, जो अभी तक नवाब की चल-अचल संपत्ति पर काबिज है। क्योंकि संपत्ति खुर्दबुर्द होने या उससे हुई आमदनी की रकम काबिज पक्ष के हिस्से से कम कर दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 के अपने आदेश के पैरा संख्या पांच में साफ-साफ कहा है कि कब्जेदारों ने आखिरी नवाब की संपत्ति से जो आमदनी अर्जित की होगी या उसे खुर्द बुर्द किया होगा उसकी रकम कब्जेदारों से वसूली जाएगी। कोर्ट ने अपने आदेश में मुर्तजा अली खां के बेटे मोहम्मद अली खां उर्फ मुराद मियां और बेटी निकहत आब्दी को कब्जेदार माना है। क्योंकि इनके पिता मुर्तजा अली खां नवाब की संपत्ति पर काबिज थे। 1982 में उनके इंतकाल के बाद ेउनके बेटे और बेटी इस संपत्ति पर काबिज हैं। वर्तमान में भी नवाब की चल-अचल संपत्ति पर मुराद मियां और निकहत आब्दी का ही कब्जा है।
सुप्रीम कोर्ट ने नवाब रजा अली खां की संपत्ति में 18 हिस्सेदार माने हैं जिनमें मुराद मियां 8.101 फीसदी और निकहत आब्दी 4.051 फीसदी की हिस्सेदार हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इनके इस हिस्से में से नवाब रजा अली खां के इंतकाल के बाद उनकी संपत्ति से अब तक हासिल हुई आमदनी और गायब हुए कीमती सामान की राशि की कटौती हो सकती है। इसके आकलन की प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सामने आएगा कि दोनों के हिस्से से कितनी धनराशि किस प्रकार से कटेगी।