रोडवेज डिपो के बेड़े में 61 बसें होने के बाद भी यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बरेली-दिल्ली और रुद्रपुर की ओर से आने वाली सवारियों से भरी बसों में खड़े होकर यात्रा करनी पड़ रही है। पर्याप्त बसों के बावजूद यात्रियों को यह परेशानी पर्याप्त चालक-परिचालक न होने के कारण उठानी पड़ रही है। हालात यह हैं कि संविदा चालक-परिचालकों के सहारे भी सभी बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
सभी बसों का संचालन न हो पाने के कारण एक ओर जहां दिल्ली-बरेली की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं जिले की एक तहसील टांडा पूरी तरह से रोडवेज डिपो से कटी हुई है। टांडा क्षेत्र के लिए डिपो से कोई बस संचालित नहीं होती। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों व तहसीलों को रोडवेज सेवा से जोड़ने के लिए डिपो से 13 लोहिया ग्रामीण सेवा की बसों का संचालन किया जा रहा है। टांडा के लिए सीधा संपर्क मार्ग न होने के कारण इस क्षेत्र में रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। टांडा जाने के लिए लालपुर होकर गुजरना पड़ता है।
इस मार्ग पर लालपुर पुल है। जो कि काफी पुराना है और उसकी चौड़ाई कम होने व हाइट गैज लगे होने के कारण उस पर बसों का संचालन संभव नहीं है। जिसके चलते टांडा तहसील के दर्जनों गांवों के लाखों ग्रामीण आज भी रामपुर से सीधे रोडवेज बस सेवा से जुड़े हुए नहीं हैं। हालांकि रामपुर से शाहबाद-सैफनी, बिलासपुर-नवाबगंज, मिलक-बिलासपुर, स्वार-बाजपुर के रूट पर लोहिया ग्रामीण बसों का संचालन हो रहा है।