योगी सरकार के निजी स्कूलों की मनमानी रोकने का आदेश बेअसर साबित हो रहा है। अभिभावकों को न तो मोटी फीस देने से राहत मिली है और न ही स्कूल से सिलेबस खरीदने की मजबूरी खत्म हो रही है। स्कूल संचालक लगातार मनमानी कर रहे हैं,लेकिन अभी तक सरकारी तंत्र इन स्कूलों पर नकेल नहीं कस पा रहा है। अभिभावक लगातार इसको लेकर सीएम से गुहार लगा रहे हैं।
यूपी में योगी आदित्यनाथ द्वारा मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद शिक्षा व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे। साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी पर भी अंकुश लगाने के आदेश दिए थे। इसके लिए शिक्षा विभाग के अफसरों को बाकायदा गाइड लाइन तक जारी की गई थी,लेकिन सरकार बनने के एक माह गुजर गया और नया शित्रा सत्र भी चालू हो गया। मगर, सरकार के आदेश का न तो सरकारी तंत्र पर ही कोई असर दिख रहा है और न ही निजी स्कूलों पर। लिहाजा निजी स्कूल बिना किसी खौफ के अभिभावकों की जेब काट रहे हैं। नर्सरी तक में एडमिशन को लेकर ही मोटी रकम वसूली जा रही है।
तमाम मदों का हवाला देकर मोटी फीस वसूली जा रही है। फीस से लेकर सिलेबस तक देने में अभिभावकों की बेधड़क होकर जेब काटी जा रही है। सीबीएसई, आईसीएसई से जुड़े स्कूलों ने तो मनमानी की हद ही कर दी है। शहर के कई स्कूल तो सीबीएसई के आदेशों को दर किनार करते हुए स्कूलों से ही सिलेबस बेच रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग ने इन पर कोई शिकंजा नहीं कसा है। अभिभावक यहां दुगने दामों में सिलेबस बेच रहे हैं। अभिभावक लगातार परेशान हो रहे हैं, लेकिन उनको कोई राहत नहीं मिल रही है। फिलहाल स्कूलों की मनमानी योगी सरकार के आदेशों पर भारी पड़ती हुई दिख रही है।