शहर से मात्र दो किलोमीटर दूर अहमदनगर जागीर ने 30 साल तक अस्तित्व की लड़ाई लड़ी। पहले इस गांव को न ग्राम पंचायत का दर्जा हासिल था और न ही यह गांव नगर पालिका में दर्ज था।
सालभर पहले प्रधानी का अधिकार मिला। ग्रामीण इस बात से खुश थे कि अब सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा, जो समस्याएं हैं, उनसे भी छुटकारा मिल सकेगा। ग्राम पंचायत के गठन के बाद गांव के रास्ते तो पक्के हो गए लेकिन, गंदे और बदबूदार पानी से निजात नहीं मिल सकी। ग्रामीण अभी भी दूषित और बदबूदार पानी पी रहे हैं।
ग्रामीण अभी शुष्क शौैचालयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्रामीणाें का कहना है कि साफ पानी मयस्सर नहीं है। गंदा नाला उनके लिए नरक बन गया है। न तो अफसर ध्यान दे रहे और न ही नेता। कई बार उनके सामने मांग रखी लेकिन सभी ने अनसुना कर दिया।