जिले में 1569 इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी पीने लायक नहीं है। जांच में क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन, नाइट्रेट, अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा अधिक पाई गई। जिसकी वजह से ग्रामीण हाई ब्लड प्रेशर, गुर्दे, त्चचा और पेट संबंधी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। इसके बावजूद ग्रामीण इन हैंडपंपों का पानी पीने को विवश हैं। करीब एक साल पहले भेजी गई इस रिपोर्ट पर भारत सरकार ने अब पहल की है।
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत इन हैंडपंपों के पानी की जांच नागपुर के एक कंपनी को दी गई है, जो अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। पहले राउंड में 1400 हैंडपंपों की जांच करने का प्लान तैयार किया गया है।
कई साल से राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत एक साल पहले करीब 10 हजार इंडिया मार्का हैंडपंपों के पानी की जांच कराई गई। जांच में 1569 इंडिया मार्का हैंडपंपों में क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन, नाइट्रेट, अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा अधिक पाई गई। हालांकि अभी तक न तो पानी के सुधार का कोई प्लान बनाया गया है और न ही हैंडपंपों को प्रतिबंधित किया गया है।
ग्रामीण अभी भी दूषित पानी पी रहे हैं। लेकिन अब भारत सरकार ने हैंडपंपों के पानी की जांच के लिए नागपुर की एडीसीसी कंपनी को ठेका दिया है। कंपनी अब पानी की टेस्टिंग करेगी। कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर दिनेश मौर्य ने बताया कि टेस्टिंग में दस टीमें लगाई गई है। प्रत्येक टीम में दो-दो कर्मचारी शामिल रहेंगे। पहले राउंड में 1400 हैंडपंपों के पानी की टेस्टिंग का प्लान है। डेढ़- दो महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी।