उत्तराखंड के कई गांवों के लकड़ी तस्कर वन विभाग पर भारी पड़ रहे हैं। पीपली वन में कीमती लकड़ी का अवैध कटान इन्हीं गांवों के तस्कर करते हैं। इनके खिलाफ उत्तराखंड पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। कलकत्ती गांव के लकड़ी तस्कर रविवार की रात भी पीपली वन में फिर घुस गए और लककार पर फायर झोंक दिया, जिससे कर्मियों को पीछे पीछे हटना पड़ा।
पीपली वन उत्तराखंड की सीमा पर है। वन से सटे कलकत्ती, कनकट, आर्यनगर, अम्बरपुर समेत कई गांव उत्तराखंड के हैं। इन गांवों में सबसे ज्यादा लकड़ी तस्कर कलकत्ती के हैं। अधिकतर ग्रामीणों का धंधा ही लकड़ी चोरी, अवैध हथियार और कच्ची शराब बनाना है। कलकत्ती के लकड़ी तस्कर हाथियारों से लैस टोलियों बनाकर पीपली में घुस जाते हैं और फिर कीमती लकड़ी काटकर ले जाते हैं। वन कर्मी अवैध कटान रोकने की कोशिश करते हैं तो लकड़ी तस्कर हथियारों से वन कर्मियों पर हमला कर देते हैं। चूंकि इस गांवों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
इसलिए उत्तराखंड पुलिस भी लकड़ी तस्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है वन विभाग के कर्मचारी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। पीपली वन में रविवार की रात भी लकड़ी तस्कर घुस गए। चहलकदमी पर वन कर्मियों ने ललकारा तो जवाब में फायर झोंक दिया। जिससे वन कर्मी पीछे हट गए।तस्करों की कुछ स्वार के वन कर्मियों से भी साठगांठ है, यह रात में पेड़ों का कटान कराने में मदद करते हैं। रविवार की रात वन कर्मियों पर फायर झोंके जाने से फिर दहशत है।