प्रशासन ने राणा शुगर मिल पर शिकंजा और कड़ा कर दिया है। मिल की निगरानी बढ़ा दी है। मिल चीनी का पैसा अब अपने पास नहीं रखेगी, बल्कि पैसा टैगिंग खाते में जमा किया जाएगा। गन्ना मूल्य भुगतान न करने पर राणा समेत तीनी चीनी मिलों को तीसरा नोटिस जारी किया गया है।
गन्ना मूल्य घोषित होने के बाद भी चीनी मिलें किसानों को भुगतान नहीं कर रही हैं। किसानों के मिलों पर करोड़ों रुपये फंस गए हैं। राणा शुगर मिल ने किसानों को अभी तक एक पैसा भी नहीं दिया है। मिल प्रबंधतंत्र ने 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की चीनी भी बेच डाली। आरोप है कि चीनी बेचकर मिल उस पैसे से नगद में गन्ना खरीद रही है।
मामला पकड़ में आने के बाद प्रशासन ने मिल पर शिकंजा कसा है। तीसरे नोटिस के बाद मिल के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। प्रशासन ने मिल पर निगरानी बढ़ा दी है। डीएम ने मिल को आदेश जारी किए हैं कि चीनी बिक्री की रकम टैगिंग खाते में जमा की जाएगी। उस रकम से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा।
खेतों से पेड़ी सिमट गई और पौधे की छोल हो रह है। मिलें अब सीेधे तौर पर गन्ना खरीद रही हैं। ऐसे में अधिकतर क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। गन्ने का क्षेत्रफल लगातार घट रहा है। अबकी बार भी कम क्षेत्रफल में गन्ना बोया गया। गन्ना मूल्य घोषित करने में देर से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
चीनी मिलों ने बिचौलियों के जरिये नगद में सस्ता गन्ना खरीदा। गन्ना केंद्रों पर कुछ दिन ही गन्ना पहुंच सका। मिलों ने अब गन्ने की सीधी खरीद शुरू कर दी है। इसलिए अधिकतर गन्ना क्रय केंद्रों पर तौल लिपिक भी नहीं पहुंच रहे हैं। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष रोशन सिंह यादव ने बंसीपुर-बकनौरी में हुई पंचायत में कहा कि चीनी मिलें किसानों को गन्ने का भुगतान नहीं कर रही हैं।
किसानों को गन्ना सस्ते में खरीदा जा रहा है। चेतावनी दी कि मिलों के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। पंचायत में जिला संयोजक अनिल कुमार, ऊदल सिंह, तोताराम यादव, बदम सिंह यादव, रामऔतार सागर, सूरजपाल सागर, राम किशोर, जगत सिंह, नेत्रराम, रूप सिंह सागर, शिवकुमार यादव भी थे।