नोटबंदी के बाद कैश के संकट ने एक गरीब की जान ले ली। कई दिन से बीमार शौहर के इलाज के लिए उसके पास रुपये नहीं थे। गुरुवार को पत्नी शहजादनगर की बैंक शाखा में लाइन में लगी थी और उधर बीमार शौहर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इससे परिजनों में कोहराम मच गया है।
नोटबंदी के कारण कैश की समस्या अब लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने लगी है। चमरौवा क्षेत्र के गांव दबका का रहने वाला गुलाम मोहम्मद सलमानी (55) काफी दिनों से बीमार चल रहा था। चार दिन पहले उसकी पत्नी फरीदन और भाई नबी मोहम्मद ने रामपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां उसका उपचार चल रहा था। उसके पास डाक्टर द्वारा लिखी गई जांचें कराने और दवाएं खरीदने के लिए रुपये खत्म हो गए। कैश निकालने के लिए पत्नी फरीदन शहजादनगर में स्थित बैंक आफ बड़ौदा की शाखा में दो दिन से लाइन में लग रही थी। लेकिन कैश हाथ नहीं आ रहा था।
गुरुवार को भी फरीदन अपने देवर नबी मोहम्मद के साथ बैंक में कैश लेने गई। मैनेजर को शौहर के बीमार होने की बात बताई, लेकिन बैंक में कैश नहीं होने के कारण तमाम भीड़ लगी थी। फरीदन को कैश नहीं मिला। कुछ देर बाद सूचना मिली की शौहर गुलाम मोहम्मद की मौत हो गई है। फरीदन बैंक के बाहर ही दहाड़ें मारकर रोने लगी। मौत से परिवार में कोहराम मच गया। बताया जाता है कि गुलाम मोहम्मद के पास कुछ एक-दो बीघा जमीन थी। वह सलमानी बिरादरी से होने के कारण गांव में हजामत बनाकर अपने परिवार का पेट पालता था।