रामपुर। जिला अस्पताल में पिछले काफी समय से त्वचा रोग विशेषज्ञ नहीं है। मरीजों को निजी चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। जिला अस्पताल में हर सातवां मरीज त्वचा रोग से पीड़ित पहुंच रहा है।
मौसम में हो रहे बदलाव के कारण लोग एलर्जी की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल पहुंचने वाला हर सातवां मरीज त्वचा रोगों से पीड़ित है। ओपीडी में शनिवार को 850 मरीज उपचार कराने के लिए पहुंचे, इनमें से करीब 110 मरीज त्वचा रोगों से पीड़ित हैं। यह मरीज दाद, खाज, खुजली की वजह से शरीर पर होने वाले इंफ्केशन, फोड़ा-फुंसी जैसी समस्याओं के उपचार कराने के लिए पहुंचे।
चिकित्सकों के मुताबिक आने वाले दिनों में यह संख्या अधिक मरीज बढ़ सकती है। शहर से लेकर देहात तक त्वचा रोग का इलाज कराने आ मरीजों को अस्पताल में त्वचा का रोग विशेषज्ञ न होने के कारण वापस लौटना पड़ रहा है। काफी दूर दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को अन्य चिकित्सकों से ही दवा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में चर्म रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है, लेकिन अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने की वजह से मरीजों को मायूस होकर प्राइवेट अस्पतालों में अपना उपचार कराना पड़ रहा है।
जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी को लेकर कई विभाग को अवगत करा दिया है। जिला अस्पताल में 30 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें सिर्फ 11 डाॅक्टर ही अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
- डॉ. बीसी सक्सेना, सीएमएस