शहर की मस्जिदों और खानकाहों में तीन तलाक और कामन सिविल कोड का मुद्दा गूंजा। उलमा ने केंद्र सरकार को चेताया कि शरीयत में किसी तरह की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आस्ताना-ए- आलिया जमालिया में भी सरकार के खिलाफ तमाम उलमा जुटे।
शहर की मस्जिदों में जुमे की नमाज से पहले तकरीर में उलमा ने केंद्र सरकार की मजम्मत की। उलमा ने कहा कि शरीयत में किसी तरह की दखलअंदाजी या उसमें किसी तरह का रद्दो बदल नहीं किया जा सकता। क्योंकि यह कानूने इलाही है जो रहती दुनिया तक कायम रहेगा। उलमा ने कहा कि मुसलमानों को कामन सिविल कोड की भी जरूरत नहीं है।
केंद्र सरकार को चेताया कि शरीयते कानून में किसी तरह की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं जाएगी। हजरत हाफिज साहब के उर्स के मौके पर भी तीन तलाक में रद्दोबदल की मुखालफत की गई। आल इंडिया तहफ्फुज शरीयत कमेटी की जानिब से आस्ताना आलिया जमालिया में तहफ्फुज शरीयत कांफ्रेंस मुनक्किद की गई। उसमें मुकामी और बाहर के तमाम उलमा जुटे। मदरसा अल जामेअतुल फातिमा नूरिया काशीपुर में हुई मीटिंग में हुकुमते हिंद की इस्लामी कानून में बेजा दखलअंदाजी और कामन सिविल कोड जैसे इस्लाम मुखालिफ मसाइल पर गुफ्तगू की गई। चेतावनी दी कि केंद्र सरकार अपना रवैया बदले।
इस मौके पर कारी मकबूल अहमद रजवी जमाली, मोहम्मद दानिश खां, हाफिज राहत अली, कारी मुरसलीन, मोहम्मद तालिब, हाजी महबूब, हाफिज शमशाद, मौलाना अब्दुल वहाब भी थे।