दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, 2022 में शुरू हुआ था काम, अब तक नहीं हुआ पानी की टंकी का निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
टांडा। सरकार की महत्वाकांक्षी पेयजल योजनाएं कागजों में भले ही सफल दिखाई देती हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। टांडा तहसील के ग्राम नवाब नगर में नमामि गंगे एवं ग्रामीण पेयजलापूर्ति विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की नवाब नगर टांडा पेयजल योजना लापरवाही का उदाहरण है।
इस योजना का कार्य 10 अक्तूबर 2022 को शुरू हुआ था। योजना की कुल लागत 166.20 लाख रुपये है और इसके माध्यम से ग्राम के 288 घरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना था। योजना के अंतर्गत लगभग 5.307 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज तक पानी की टंकी का निर्माण अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि काम महज दो से तीन माह चला और उसके बाद अचानक बंद कर दिया गया। पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत तक नहीं कराई गई, जिससे आए दिन बाइक सवार और राहगीर गिरकर घायल होते रहे। हालात इतने खराब हो गए कि मजबूरी में ग्रामीणों ने अपने खर्चे से अपने घरों के सामने और आसपास की सड़कों की मरम्मत कराई।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अधिकतर घरों में करीब 20 फीट गहराई के हैंडपंप और नल लगे हैं, जिससे उन्हें दूषित पानी पीना पड़ता है। गर्मी के मौसम में जब भूजल स्तर और नीचे चला जाता है, तब हालात और बदतर हो जाते हैं। ऐसे में लोग गांव में मौजूद तालाब से गंदे पानी को पंप के जरिये निकालकर पीने को मजबूर हो जाते हैं, जो गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहा है।
ग्राम निवासी मोहम्मद उमर ने बताया कि वे कई वर्षों से पानी की टंकी के पूरा होने की आस लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2022 में उम्मीद जगी थी जब काम शुरू हुआ, लेकिन दो-तीन माह बाद ही सब कुछ ठप हो गया। आज तक न तो काम दोबारा शुरू हुआ और न ही किसी अधिकारी ने सुध ली। दूषित पानी पीने के कारण गांव में बीमारियां बढ़ रही हैं।