अखिल भारतीय मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम के जरिए मुल्क को प्यार-मोहब्बत का पैगाम दिया। आवाम को कौमी एकता की माला में पिरोने की कोशिश की। सियासत और सियासियों पर तंज कसे। खबरदार किया कि सियासतदां मुल्क में नफरत फैला रहे हैं। इनकी नियत को अच्छी तरह पहचानों।
लोकहित सोशल एजुकेशनल डेवलेपमेंट एसोसिएशन की जानिब से शनिवार की रात घूंघट मैरिज हाल में मरहूम शायर शौक असरी की याद में अखिल भारतीय मुशायरा हुआ। जिसका आगाज समां रोशन कर हुआ। शौक असरी साहब के शार्गिद शहजादा गुलरेज की दस्तारबंदी की गई।
साथ ही शायर अहमद जियाई की लिखी किताब आखिरी ख्वाब का इजरा (विमोचन) किया गया। इसके बाद सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के सदर सीनशीन आलम नईम नजमी और ताहिर फराज ने शहजादा गुलरेज, जुबैर अहमद मसूद और अहमद जियाई को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
मरहूम शौक असरी साहब की नात और गजल से मुशायरे को आगे बढ़ाया। दिल्ली से आए शम्स रमजी ने कलाम के जरिए अवाम को कौमी- एकता की माला में पिरोने की कोशिश की। चंदौसी के सर्वेश ने उर्दू की शान में कलाम पेश किए। नश्तर अमरोही ने सियासत और सियासियों पर तंज किए।
मुल्क की आवाम को खबरदार किया कि सियासी अपने मफाद की खातिर नफरत फैला रहे हैं। इनकी नीयत को समझने की जरूरत है। बदायूं के हसीब सोज ने अमीरी और गरीबी का फर्क मिटाने की सीख दी। बरेली के आकिल नोमानी, तहव्वर बदायूंनी, अंजुम सिहारवी ने अपने कलाम के जरिए भाई चारा और मुल्क में अमन चैन कायम रखने का पैगाम दिया।
मुशायरे में जुबैर मसूद खां, शरीफुर्रहमान कुरैशी, आले अहमद सुरूर, अजीज बकाई, अजहर इनायती, ताहिर फराज, अहमद जियाई, इफ्तखार ताहिर, अकील नोमानी, नईम नजमी, जिया इनायती, मास्टर असरार अहमद, असलम खां भी थे। मुशायरे की निजामत शकील गौस ने की।