रामपुर। दस मोहर्रम यानी यौमे आशूरा पर शुक्रवार को इमामबाड़ा खासबाग में या हुसैन या हुसैन की सदाओं के बीच जरीह-ए-अकदस उठाई गई। गमगीन धुनों पर मोमेनीन ने मातम किया और नोहाख्वानी की गई।
जरीह-ए-अकदस के साथ अलम भी थे। पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने लेबनान के सर्वोच्च धार्मिक नेता सय्यद हसन नसरल्लाह द्वारा भेंट किया गया विशाल परचम थाम रखा था। इससे पूर्व इमामबाड़ा खासबाग में मजलिस हुई, जिसमें बयान-ए-कर्बला सुनकर लोग रो पड़े। जरीह-ए-अकदस को सलामी भी पेश की गई। नवाबजादा हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां ने जरीह-ए-अकदस को कांधा दिया। यहां पूर्व सांसद बेगम नूरबानो भी मौजूद रहीं। पूर्व मंत्री के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि इस बार कोरोना गाइडलाइन की वजह से इमामबाड़ा खासबाग से सीआरपीएफ होते हुए कर्बला तक निकाला जाने वाला जुलूस बरामद नहीं हुआ। सिर्फ इमामबाड़ा खासबाग में जुलूस की रस्म अदायगी हुई।