रामपुर। सांसद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को मंगलवार को मेदांता अस्पताल से सीतापुर जेल शिफ्ट किए जाने पर उनकी पत्नी और शहर विधायक डॉ. तजीन फात्मा ने कहा कि अभी आजम खां गंभीर रूप से बीमार हैं। ऐसे में उन्हें किस साजिश के तहत जेल में शिफ्ट किया गया है, ये उन्हें नहीं पता। कहा कि आजम खां पोस्ट कोविड स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में अगर उनकी तबीयत खराब होती या कुछ भी होता है तो मेदांता, प्रशासन-शासन जिसने भी यह करवाया है, वही लोग जिम्मेदार होंगे।
आजम खां के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू की ओर से डॉ. तजीन फात्मा की प्रतिक्रिया उपलब्ध कराई गई। जिसमें डॉ. तजीन फात्मा ने आजम खां को जेल में शिफ्ट किए जाने पर नाराजगी जताई है। आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें भी अचानक पता चला कि आजम खां को मेदांता अस्पताल से सीतापुर जेल शिफ्ट कर दिया गया है। कहा कि आजम खां अब भी गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं, दो-तीन दिन पहले उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो गया था। इसके अलावा उनका ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है और हार्ट की भी प्रॉब्लम है। इसलिए उन्हें अभी इलाज की और जरूरत थी। कहा कि वो नहीं जानती कि किन कारणों से या किस साजिश के तहत उन्हें मेदांता अस्पताल से सीतापुर जेल शिफ्ट किया गया। वो भी इतनी गोपनीय परिस्थितियों में कि परिवार वालों को भी कानों कान खबर नहीं मिली। डॉ. तजीन फात्मा ने कहा कि हमारा संविधान भी हर व्यक्ति को जीवन का अधिकार देता है और इस तरीके से एक सांसद को भी इलाज का अधिकार न देना जुल्म की एक चरम सीमा है।
कहा कि इतने गंभीर मरीजों के लिए बहुत सी चीजों और बहुत सी मशीनों की जरूरत पड़ती है, जो जेल में उपलब्ध नहीं होती हैं। कहा कि मैं भी जेल में 10 महीने रही हूं और जेल शाम 7:00 बजे बंद हो जाती है और उसके बाद सुबह 5:00 बजे खुलती है। जेल में अगर कोई अचानक बीमार हो जाता है या और कुछ हो जाता है तो सूचना जाने में या जेल खुलवाने में एक से दो घंटे लग जाते हैं। उसके बाद डॉक्टर को उपलब्ध कराने में भी समय लगता है। इन परिस्थितियों में आजम खां कि तबीयत खराब होती है या उनकी सेहत में गिरावट होती है या कुछ भी होता है तो यह जिसने भी करवाया है चाहे वह मेदांता हो या प्रशासन शासन हो, जो भी हो वही लोग जिम्मेदार होंगे। कहा कि आजम खां बेहद कमजोर हो गए और उन्हें अब भी पोस्ट कोविड प्रॉब्लम और परेशानियां है। ऐसी स्थिति में एक व्यक्ति को जबरदस्ती आदेश थमा देना कि आपको शिफ्ट किया जाता है, मेरे ख़्याल से इससे ज्यादा जुल्म और कोई नहीं हो सकता। उनके फेफड़ों में संक्रमण हुआ था। उनकी किडनी में संक्रमण था और यहां तक कि उनकी जुबान में भी अल्सर हो गया था और खाना खाने के लिए भी राइसट्यूब पड़ा हुआ था। वह सब चीजें अभी तक सामान्य नहीं हो पाई हैं। ऐसे में उन्हें मेदांता अस्पताल में उपचार सही मिल सकता था। जेल में समुचित उपचार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कहां इंसाफ है और ऐसी स्थिति में कहां इंसाफ छुपा है? डॉ. तजीन फात्मा ने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई सूचना न सीतापुर प्रशासन से दी गई न ही मेदांता अस्पताल या जेल प्रशासन से दी गई।