रामपुर। जनपद में तीन हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से 2363 वक्फ संपत्तियां सरकारी जमीन पर हैं। इन वक्फ संपत्तियों को पंजीकृत करने के लिए सरकार की ओर से लॉन्च किया गया उम्मीद पोर्टल भी खरा नहीं उतर पाया है। कैंप लगाने के बाद भी अभी तक 20 फीसदी संपत्तियों का ही पंजीकरण हो पाया है। कागजात जुटाने के लिए वक्फ संपत्तियों के संचालकों के पसीने छूट रहे हैं। उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण करने की अंतिम तिथि पांच दिसंबर है।
वक्फ कानून बनने के बाद जिले में वक्फ संपत्तियों का सर्वे कराया गया था। करीब दो माह तक चले सर्वे के बाद यह पाया गया कि जिले में कुल 3012 वक्फ संपत्तियों में से 2,363 संपत्तियां सरकारी भूमि पर अवैध रूप से दर्ज हैं। यह कुल वक्फ संपत्तियों का लगभग 70 प्रतिशत है, जिसमें 396 हेक्टेयर सरकारी जमीन शामिल है। प्रशासनिक अफसरों के अनुसार वक्फ संपत्तियों की जांच में राजस्व अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया था कि वक्फ संपत्ति केवल वही हो सकती है, जिसे कोई व्यक्ति निजी तौर पर दान करता है। सरकारी भूमि को वक्फ में दान करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। सर्वे रिपोर्ट रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। सर्वे के बाद ही शासन की ओर से वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण कराने के लिए उम्मीद पोर्टल शुरू किया गया था। जून माह में शुरू किए गए इस पोर्टल पर संपत्तियों को पंजीकृत करने की तारीख पांच दिसंबर तय की गई है। इस बीच इन संपत्तियों के पंजीकरण की रफ्तार भी धीमी है। इसको लेकर कैंप भी लगाए जा रहे हैं। अफसरों के दावों के मुताबिक अब तक लगाए गए कैंपों में केवल 20 फीसदी संपत्ति का ही पंजीकरण हो सका है।
वेबसाइट पर भी आ रही है दिक्कत
उम्मीद पोर्टल की वेबसाइट भी काफी धीमी गति से चल रही है। लोगों को पंजीकरण कराते समय घंटों तक का इंतजार करना पड़ रहा है लेकिन फिर भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। लॉग-इन करने पर गांव, वार्ड, शहर आदि खोजने में दिक्कत होती है। सुबह के समय वेबसाइट कुछ ठीक चलती है लेकिन दोपहर के बाद वेबसाइट काम करना ही बंद कर देती है और मिनटों का काम घंटों में भी पूरा नहीं हो पाता है।
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संपत्तियों के पंजीकरण में यह हैं चुनौतियां
-कुछ संपत्तियों के मुतवल्लियों का निधन हो गया है।
- कई मुतवल्लियों को जानकारी का अभाव है।
- वक्फनामा, नक्शा, दफा-37 की रिपोर्ट जैसे दस्तावेज नहीं हैं।
- लोगों के पास वक्फ संपत्ति नंबर नहीं हैं जिससे दस्तावेज भी नहीं मिल पा रहे हैं।
- वेबसाइट धीमी होने के चलते फॉर्म नहीं भर पा रहे।
- पोर्टल पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के चलते फॉर्म भरने के बाद भी स्वीकृत नहीं हो रहे।
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करीब 396 हेक्टेयर जमीन निकली सरकारी
जिले में 3365 ऐसी संपत्तियां हैं, जिनका सर्वे कराया गया और उसमें यह बात साफ हो गई कि 3365 जो वक्फ संपत्तियां में से 3363 जो करीब कुल संपत्ति का 70%है। इसका क्षेत्रफल करीब 396 हेक्टेयर है। वह सरकारी संपत्तियां हैं।
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रिकार्ड के लिए भटक रहें मुतवल्ली
रामपुर। संपत्तियों के सरकारी रिकार्ड को खंगालकर उनको जुटाने में मुतवल्लियों की दिक्कतें बढ़ी हुई हैं। पुराना रिकार्ड न तो राजस्व विभाग के पास मिल पा रहा है और न ही विभाग में। ऐसे में कागजात जुटाने में बढ़ी दिक्कत है।
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-वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में काफी दिक्कतें आ रही हैं। जिले में ही अब तक बीस फीसदी से भी कम संपत्तियों का पंजीकरण हो पाया है। इन संपत्तियों के पंजीकरण में सबसे ज्यादा दिक्कत वेबसाइट के न चलने की है और कागजात जुटाने की है। इसमें समय और दिया जाना चाहिए। -अनस नदीम, अधिवक्ता एवं समाजसेवी
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शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जिले में 3012 वक्फ संपत्तियां हैं। इसमें से 2363 वक्फ संपत्तियां सरकारी जमीन पर हैं दर्ज हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। शासन से ही ये पोर्टल में अपडेट होंगी। नितिन मदान, एडीएम प्रशासन