अन्नदाता एक बार फिर मुसीबत से घिरे नजर आ रहे हैं। पांच साल में इस बार औसत से ज्यादा बारिश ने धान की फसल की लंबाई बढ़ा दी है। लिहाजा, धान की पैदावार तीस फीसदी तक घटने की आशंका है। जिसकी वजह से किसान चिंतित हैं।
बिलासपुर के तराई की सरबती, बासमती चावल बेहद प्रसिद्ध है, जो पूरे देश और विदेशों तक में अपनी खुशबू बिखेरता है। यहां का किसान गेहूं, धान, गन्ना आदि की खेती को अधिक महत्व देता है। मगर, इस बार हुई अधिक बारिश ने किसान के खेतों में खड़ी धान की फसल प्रजातियों को समय से पहले ही कुछ ज्यादा ही लंबा कर दिया है।
किसानों का कहना है कि ज्यादा बारिश के कारण ही पौध अधिक लंबा होने की वजह से पौधे की जड़ें कमजोर हो गई हैं। पहले पौध की जड़ में जो 25-30 तक धान के पौधे निकलते थे, जो धान का उत्पादन की औसत को मोटा धान प्रति एकड़ 25-30 क्विंटल व सरबती की औसत 15 क्विंटल प्रति एकड़ आ जाती थी।
मगर, इस बार हर जड़ में बीस से कम ही पौधे निकले हैं, जो उत्पादन कम करने की निशानी तो है ही, मगर तेज हवा में फसल गिरने का खतरा पैदा हो रहा है, वह उत्पादन को करीब तीस प्रतिशत से अधिक कम कर देगा। धान में उर्वरक, कीटनाशक की लागत भी हर साल बढ़ रही हैं, मगर लागत भी नहीं मिल पाती है।
धान की लंबाई अधिक होने से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। किसान चिंतित न हों। तेज हवाएं चलीं तो नुकसान हो सकता है। -डा. अमर सिंह राठी, कृषि वैज्ञानिक जिला कृषि विज्ञान केंद्र।