शहर में जरी मुकद्दस का जुलूस बरामद हुआ। मुकामी और बाहर से आईं अंजुमनों ने नोहाख्वानी और अजादारों ने मातम किया। या हुसैन या हुसैन की सदाओं से फिजा गूंज उठी। जुलूस कई रास्तों से गुजरता हुआ इमामबाड़ा खासबाग पहुंचा।
29 जिलहिज को विधायक नवेद मियां के बेटे हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां ने मिस्टनगंज से जरी मुकद्दस को कांधा देकर रवाना किया। यहां इब्तदाई नोहा पढ़ा- लो हुसैनी काफिला घर से रवाना हो गया, दूर नाना से नवासे का ठिकाना हो गया। इसके बाद जुलूस इमामबाड़ा खास बाग की जानिब रवाना हो गया।
सबसे आगे बच्चे हाथों में आलम थामे चल रहे थे। साथ ही अंजुमने नोहाख्वानी कर रही थीं। सिरसी की अंजुमन हाशमी, मुकामी अंजुमन सिपाहे हुसैनी, गुलामे हुसैनी और बच्चों की अंजुमनों ने नोहे पढ़े। अंजुमनों ने यह नोहा भी पढ़ा-आ गया माहे अजा, आंसू बहा लो सैयदा। एक कतरा पानी भी न दे सका, बहता हुआ दरिया प्यासे को। जुलूस में सबसे पीछे अजादार जरी मुकद्दस लिए चल रहे थे। जुलूस मिस्टनगंज से राजद्वारा, नवाबगेट, गांधी समाधि, जौहर रोड से राहे जुल्फिकार रोड होता हुआ इमामबाड़ा खासबाग पहुंचा। यहां भी नोहाख्वानी की गई। जुलूस में औकाफ के सेकेट्री गुलरेज खां, आमिर हाशम, सैयद आलम अली, शामिल थे।