हजरत अब्बास की याद में शहर में अलम मुबारक का जुलूस निकाला गया। अंजुमनों ने नोहाख्वानी और अजादारों ने मातम किया। जुलूस कई रास्तों से गुजरता हुआ किला इमामबाड़ा पहुंचा। 11वें मोहर्रम पर इमामबाड़ा जफर अली बेग लाल कब्र से हजरत अब्बास की याद में अलम मुबारक का जुलूस बरामद हुआ।
इससे पहले मौलाना उरूज मेहंदी ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने शहीदाने कर्बला का जिक्र किया। जिक्रे हुसैन आया तो लोगों की आंखें नम हो गई। इसके बाद जुलूस रवाना हुआ। इफ्तखार महमूद और असलम महमूद ने यह नोहा पढ़ा कि ये काफिला तो हुसैन का है हुसैन इनमें मगर कहां हैं। लुटी हुईं सी हैं बीवियां कुछ के इनके सरकार कहां हैं।
नोहे के बाद जुलूस आगे बढ़ा। जुलूस में अजादार हाथों में अलम मुबारक थामे चल रहे थे। अंजुमने नोहाख्वानी और अजादार मातम कर रहे थे। गमगीन माहौल में जुलूस लालकबर से बजरिया मुल्ला जरीफ, कोयले वाली मस्जिद, नौदरा चौकी से होता किला इमामबाड़ा पहुंचा। यहां भी नोहे पढ़े और मातम किया।
बाद में अलविदाई नोहा पढ़ा गया। जुलूस में बिट्टन जैदी, शान जैद, राशिद हिलाल, जुल्फिकार आदिल, इकबाल बेग, एस कमल रिजवी भी थे। दूसरी ओर शहीदाने करबला के सोयम पर 26 अक्तूबर को इमामबाड़ा खासबाग से जुलजुनाह का जुलूस निकाला जाएगा।