पाकिस्तान की जेल में 30 साल की सजा काटने के दौरान मोहम्मद अहमद अपनी याद्दाश्त खो बैठा। 2012 में पाकिस्तान ने उसे रिहा तो कर दिया, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। अमृतसर में इलाज के दौरान वो खुद को कभी मुरादाबाद तो कभी रामपुर का रहने वाला बताता था।
पंजाब पुलिस के साथ वो अपनी पहचान तलाशने रामपुर पहुंचा। शुक्रवार शाम गंज थाना क्षेत्र के घेर अलफ खां निवासी उसके दूर के रिश्तेदार फिरोज ने उसकी पहचान कर ली। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। मोहम्मद अहमद की कहानी फिल्मों सरीखी है। पुलिस और खुद उनके अनुसार वो 30 साल पहले पाकिस्तान में पकड़ा गया था।
आरोप था कि उनके पास वीजा नहीं है। उसको पाकिस्तान की जेल में डाल दिया गया। पाकिस्तान की जेल में वो लंबे समय तक बंद रहे। वर्ष 2012 में पाकिस्तान ने कुछ भारतीय कैदियों को रिहा किया, उसमें मोहम्मद अहमद का नाम भी था। मोहम्मद अहमद 2012 में भारत तो आ गए, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।
वो कहां के रहने वाले हैं, ये नहीं बता पा रहे थे। लिहाजा उसका अमृतसर में ही इलाज कराया गया। तीन साल तक इलाज चलने के बाद उनकी मानसिक हालत में कुछ सुधार हुआ। उन्होंने खुद को यूपी के मुरादाबाद जिले का रहने वाला बताया।
पंजाब पुलिस ने मुरादाबाद से संपर्क साधा, लेकिन वहां से कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद मोहम्मद अहमद ने खुद को रामपुर का निवासी बताया। पंजाब पुलिस मोहम्मद अहमद को लेकर रामपुर पहुंची और डीएम से मिली। स्थानीय पुलिस की मदद से उसको शहर के पुराने इलाके में घुमाया गया।
पंजाब पुलिस के दरोगा निर्मल सिंह ने बताया कि मोहम्मद अहमद के परिजनों की तलाश में शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कुंडा, बढ़इयों वाली मास्जिद और गंज थाना क्षेत्र के मोहल्ला घेर अलफ खां, नज्जू खां समेत कई मोहल्लों में की गई। दिनभर की तलाश के बाद कुछ ने इनकी पहचान ही नहीं की।
कुछ ने इतना जरूर कहा कि उनके परिवार में लोग रहते थे, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। शुक्रवार शाम गंज थाना क्षेत्र के घेर अलफ खां निवासी उसके दूर के रिश्तेदार फिरोज ने उसकी पहचान कर ली। गंज थाना प्रभारी जीत सिंह का कहना है कि मोहम्मद अहमद के परिवार का कोई सदस्य नहीं मिला है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। उसके दूर के रिश्तेदार ने पहचान की है। उसको फिलहाल फिरोज के हवाले कर दिया गया है।
30 साल तक काल कोठरी में रहने वाले मोहम्मद अहमद को अपनों की तलाश है। 30 साल तक वो पाकिस्तानी में जुल्म का शिकार होता रहा और उसने मानसिक संतुलन खो दिया। उनकी मानसिक हालत काफी खराब है। वो अपने बारे में कुछ खास नहीं बता पा रहा है।
किशोरावस्था में पाकिस्तान पहुंचने की जल्दबाजी में पाकिस्तानी फौज ने उसे पकड़ा और जेल में डाल दिया। जेल में उस पर ऐसी जुल्म हुआ कि वो सुधबुध खो बैठा। काल कोठरी से निकलकर वो अपने वतन तो पहुंच गया, लेकिन अपनों से नहीं मिल पाया।
पाकिस्तान में अपने जुल्म की सजा भुगत चुके मोहम्मद अहमद के साथ अभी भी पंजाब पुलिस अपराधियों जैसा सुलूक कर रही है। परिजनों की तलाश में रामपुर पहुंची पुलिस के साथ मोहम्मद अहमद भी था। पुलिस ने उसे बकायदा अपराधियों की तरह हथकड़ी पहना रखी थी।
हथकड़ी में जकड़ा मोहम्मद अहमद काफी सहमा हुआ भी था। हालांकि पुलिस का कहना है कि वो मानसिक रूप से बीमार था और इधर-उधर भाग रहा था। इसकी वजह से उसे हथकड़ी लगाई गई है। वो अभी सरकारी निगरानी में है।