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अंतर्मन में निहित भाव होते हैं नैतिक मूल्य

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रामपुर। राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शिक्षा में मानवीय मूल्य और व्यवसायिक नैतिकता: आवश्यकता एवं महत्व विषय पर सभी ने अपने-अपने विचार रखे। कहा कि नैतिक मूल्य अंतर्मन में निहित भाव होते हैं।
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गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्य अंतर्मन में निहित वे भाव होते हैं, जो स्वत: स्फूर्त उत्तरदायित्व के आचरण को प्रेरित करते हैं। की-नॉट स्पीकर के रूप में पधारे डॉ. हबीब इकराम ने मंच से बोलते हुए कहा कि सत्यम शिवम सुंदरम मानव चिंतन की पराकाष्ठा है। बेहतर समाज के निर्माण के लिए अस्तो मां सद्गमय, सत्यमेव जयते, वसुधेव कुटुम्बकम जैसे चिरन्तन भारतीय मूल्यों की सहायता से भारत को पुन: विश्व गुरु के रूप में स्थापित किया जा सकता है। मुख्य वक्ता मोहम्मद मियां ने जीवन जीने की कला में मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मूल्य रहित शिक्षक देश निर्माण में योगदान नही दे सकते। पूर्व प्राचार्य डॉ. राजमणि शुक्ला ने कहा की कौन सी हवा चली ये मूल्य धूल धूल हो गए, फूल आज शूल हो गए, आम क्यों बबूल हो गए। डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. मौअज्जम अहमद ने कहा कि व्यवसायिक शिक्षा में मनसा, वाचा, कर्मणा तीनों ही आयाम में नैतिक मूल्यों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए। डॉ. गिरीश वत्स ने कहा कि मूल्यों के विकास के लिए शिक्षा के साथ दीक्षा होना भी जरूरी है। तकनीकी सत्र में डॉ. विकास शर्मा ने अध्यक्षता की। डॉ. मोहम्मद हनीफ, डॉ. मंजू गुप्ता, डॉ. प्रेम किशोर, कहकशा, आंचल जैन, डॉ. कमल सिंह, मधु रानी, मोहम्मद सादकीन , प्रमोद कुमार, रेशमा परवीन, आरहम खान, प्रदीप शर्मा ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। अंत मे प्राचार्य डॉ. पीके वार्ष्णेय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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