रामपुर। वृंदावन से पधारे कथा व्यास लीला रसिक महराज ने कहा कि प्रभु की मूरत मन ने बसा लेने से मनुष्य के जीवन की नैया पार हो जाएगी। उन्होंने सत्संग का महत्व भी श्रद्धालुओं को बताया।
शनिवार को श्रीकृष्ण चरित प्रचार महाकाव्य समिति की ओर से प्राचीन श्रीराधा कृष्ण मंदिर में श्रीकृष्ण चरित रसायन महाकाव्य कथा का प्रारंभ हुआ। जिसमें वृंदावन से पधारे लीला रसिक जी महाराज ने कहा कि सत्संग करने से भगवान की भक्ति का ज्ञान होता है। भक्ति का ज्ञान उत्पन्न होने पर ही मनुष्य में बैराग्य उत्पन्न होता है। अगर प्रभु के प्रति बैराग्य उत्पन्न हो जाते तो मनुष्य इस अघोर कलियुग में भव सागर को प्राप्त कर लेगा। उन्होंने भगवान के भजन की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भजन के समय उसके शब्दों पर ध्यान लगाओगे तो परमात्मा का साक्षात्कार हो जाएगा। राम किंकर जी महाराज और माता रश्मि जी ने भजन प्रस्तुत किए तो श्रद्धालु भक्ति भाव में खोकर नृत्य करने लगे। इस दौरान गिरीराज अग्रवाल, शिवकांत अग्रवाल, शोभित, दिनेश अग्रवाल, कृष्ण अवतार, प्रवीण, मनोज, रमेश, योगेश, राजीव, सुधीर, सचिन, पंकज, अनिल, सर्वेश, विपिन, घनश्याम आदि मौजूद रहे।