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Rampur News: साठा धान छोड़िए...मक्का, उड़द-मूंग उगाइए और मुनाफा कमाइए

Sat, 25 Jan 2025 01:23 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर । जिले में इन दोनों साठा धान की खेती पर जिला प्रशासन सख्ती बरत रहा है। करण यह है कि साठा धान से किसानों को तो नुकसान है ही, साथ ही जमीन बंजर होने का खतरा है और अधिक सिंचाई की जरूरत होने से जल दोहन अधिक होता है। इसीलिए अधिकारी साठा धान की खेती न करने के लिए किसानों से अनुरोध भी कर रहे हैं। जिले के तराई क्षेत्र बिलासपुर और स्वार में साठा धान की सबसे अधिक खेती होती है। डिजिटल क्रॉप सर्वे में पता चला है कि जिले में 12000 हेक्टेयर भूमि पर साठा धान (जायद) की फसल उगाई जाती है। इसकी रोपाई फरवरी के अंतिम सप्ताह से 15 मार्च तक किसान करते हैं। फसल तैयार होने के बाद पराली जलाने का भी झंझट रहता है। इन तमाम मुद्दों को लेकर कृषि विभाग ने साठा धान की खेती करने वाले किसानों को मक्का, उड़द और मूंग की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। मक्का और दलहनी फसलों में लागत भी काम आती है और उत्पादन भी बेहतर होता है। यह फसलें किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित होती हैं। अनुदान पर बीज भी मिल जाता है। यही नहीं, बाजार में मक्का की मांग भी बहुत रहती है। कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि साठा धान की फसल को हर वक्त पानी की जरूरत होती है। इसलिए अंधाधुंध जलदोहन होता है। इसी कारण जिले में साठा धान की खेती पर प्रतिबंध लगाया गया है।


उड़द-मूंग बीज के नि:शुल्क मिलेंगे किट, मक्का पर छूट
जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि पिछली बार मक्का 2200 रुपये प्रति क्विंटल बिका था, जबकि साठा धान 1400-1500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बिका था। मक्के का उत्पादन प्रति हेक्टेयर में 60 क्विंटल से भी अधिक है। इसी तरह उड़द-मूंग का बीज प्रति हेक्टेयर में 10-15 किलो लगाता है और 40 से 70 क्विंटल उत्पादन होता है। उन्होंने कृषि निदेशालय से तीन कंपनियों के मक्का बीज मांगे हैं। उड़द और मूंग के किट आ रहे हैं, जो किसानों को कृषि बीज भंडारों से नि:शुल्क मिलेंगे। उन्होंने बताया कि पिछली बार उड़द-मूंग के 600 किट जिले को मिले थे। इस बार भी इतनी ही मात्रा में मिनी बीज किट मिलने की उम्मीद है। इस प्रत्येक किट में दो किग्रा बीज होता है। प्रति हेक्टेयर में 15-20 किग्रा बीज लगता है। एक किसान को एक ही मिनी बीज किट मिलेगा। उन्होंने बताया कि देश में दालों की आवक विदेश से होती है। इसलिए किसानों दलहनी फसलों को उगाए और इन फसलों पर खर्च कम उत्पादन अधिक होता है।
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साठा धान उगाने से नुकसान
- मिट्टी यदि रेतली है तो उसमें हर दो दिन में सिंचाई करनी होती है।
- सप्ताह में दो बार और फसल तैयार होने तक 25 बार सिंचाई करनी होती है।
- एक किलो चावल तैयार होने में 4800 लीटर पानी खर्च होता है।

मक्का, उड़द-मूंग की खेती फायदे का सौदा
- मक्का की खेती में लागत कम आती है।
- यह फसल चार से पांच बार की सिंचाई में हो जाती है।
- मक्का की बिक्री भी आसानी से हो जाती है।
- मक्का के प्रति किलो बीज पर 50 प्रतिशत छूट मिलती है।

वर्जन- फोटो हैं-
स्वार क्षेत्र के नानकार में एक किसान ने साठा धान रोपाई की तैयारी में पौध उगाई थी। इस पौध से करीब आठ एकड़ में धान लगाया जा सकता था। इस साठा धान की खेती करने वाले किसानों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी और कृषि विभाग की टीमें साठा धान की खेती करने वाले किसानों की निगरानी भी कर रहे हैं, जहां पौध मिल रही है उसको नष्ट भी करा रहे हैं। - कुलदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी


साठा धान की पौध गर्मियों में लगाई जाती है और उस समय मौसम का तापमान 42 से 45 डिग्री रहता है। ऐसे में उस फसल को हर समय पानी की जरूरत रहती है। इस धान फसल के लिए वैज्ञानिक भी सलाह नहीं देते हैं। इसका रेट भी अच्छा नहीं होता है। अधिकतम 12-13 सौ रुपये क्विंटल के भाव में बिकता है। सबसे अच्छा बेबी कॉर्न प्रजाति वाले मक्के को साल के किसी महीने में बुआई कर सकते हैं। गर्मियों में भी ये 55 दिन में तैयार हो जाता है।
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- मयंक राय, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र धमौरा


सदर, बिलासपुर, स्वार और सैदनगर क्षेत्र के गांवों में लोग साठा धान की खेती करते हैं। इस धान की पैदावार अच्छी है। जानवरों का नुकसान कम होता है। साठा धान में पानी की बहुत जरूरत रहती है। भूजल स्तर का स्तर नीचे जा रहा है। इसलिए प्रशासन रोक लगा रहा है। हम लोग भी किसानों को पानी के लिए जागरूक कर रहे हैं।

- हसीब अहमद, प्रदेश महासचिव, भाकियू-टिकैत
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