लालपुर बैराज परियोजना पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं। स्थानीय भाजपाइयों ने इसके औचित्य पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार बदलने के साथ ही सूबे के कद्दावर मंत्री आजम खां के इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। जौहर विश्वविद्यालय के निकट काम होने की वजह से आरोप लगने लगा है कि लालपुर बैराज के निर्माण के पीछे कहीं न कहीं पूर्व मंत्री का भी निजी हित है। उल्लेखनीय है कि आजम ने ही जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना कराई है। फिलहाल भाजपा के इस तेवर के बाद संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
टांडा की पांच लाख की आबादी को रामपुर से जोड़ने के लिए सपा सरकार में लालपुर के पुराने पुल पर सिंचाई के लिहाज से लालपुर बैराज का निर्माण को मंजूरी दी गई थी। रामपुर और टांडा को जोड़ने वाला लालपुर पुल क्षेत्र के लोगों के लिए खास है।
कोसी नदी पर अंग्रेजों के शासन में बना पुल काफी जर्जर हालत में था। पुल की हालत जर्जर होने के मामले को नगर विकास मंत्री आजम खां ने गंभीरता से लेते हुए यहां पर नए सिरे से नए पुल का निर्माण कराने को मंजूरी दिलाई थी। मंजूरी के बाद यहां पर सेतु निगम की ओर से लालपुर पुल का निर्माण कराया जा रहा है। 212 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले बैराज को पुल से काफी दूर बनाया जा रहा है। दस करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जाने वाले इस पुल के निर्माण के लिए सेतु निगम को यूं तो जून 2017 का वक्त दिया गया है। वहीं साल भर पहले इस बैराज का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था, लेकिन अभी तक बैराज का 30 फीसदी काम हो सका है। प्रदेश में निजाम बदल चुका है प्रदेश में भाजपा की सरकार आ गई है। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के साथ ही पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के प्रोजेक्ट पर काली छाया पड़ती नजर आ रही है।
भाजपा ने अब इस पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। दरअसल उनका सवाल यह है कि पहले तो पुल को तोड़ा नहीं जाना चाहिए। पहले नए पुल का निर्माण होता इसके बाद बैराज उसी स्थान पर बनाया जाता है। सवाल यह भी है कि जौहर यूनिवर्सिटी के पास ही बैराज का निर्माण हो रहा है। यानी पब्लिक के लिए यह कम बल्कि जौहर यूनिवर्सिटी के पिकनिक स्पाट को और ज्यादा खूबसूरत बनाने के लिहाज से यह फैसले हुए हैं। भाजपाई कहते हैं कि इन प्रोजेक्ट पर रोक लगाई जानी चाहिए।