रामपुर में रविवार को घाटमपुर में खेतों में भरे को पार करने के लिए साइकिल कंधे पर रखकर गुजरते ग्रा?
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रामपुर। रामनगर बैराज से कोसी में छोड़ा गया पानी रामपुर आना शुरू हो गया है। इससे नदी का जलस्तर फिर से बढ़ गया है। रामपुर में घाटमपुर में स्वर्गधाम के नजदीक तक पानी पहुंच गया है। सैदनगर का जंगल और नदी के आसपास के इलाके में पानी ही पानी नजर आया। हालांकि, अधिकारी अभी बाढ़ का खतरा न होने का दावा कर रहे हैं। रविवार को भी रामनगर बैराज से महज 3518 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदी भी करीब 250 सेंटीमीटर पर बह रही है।
पिछले कुछ दिनों से हर रोज बारिश हो रही है। खासकर, पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश की वजह से नदियां भी लबालब नजर आने लगी हैं। लालपुर स्थित कोसी नदी की बात की जाए तो दिनों यहां का जलस्तर बढ़ा हुआ है। शनिवार को ही रामनगर बैराज से 42369 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो रामपुर आना शुरू हो गया है। इस वजह से नदी जलस्तर और बढ़ गया है। आलम यह है कि रविवार को नदी का पानी सैदनगर क्षेत्र के जंगल में फैल गया। घाटमपुर के आगे तक पानी आ चुका है, जो स्वर्गधाम के गेट के नजदीक पहुंच गया है। लगातार जलस्तर बढ़ने की वजह से लोगों में डर है कि यदि इसी तरह से पानी आने का सिलसिला जारी रहा तो नदी के पास बसे गांवों में बाढ़ का पानी तबाही मचा सकता है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व रामभरत तिवारी ने बताया कि कोसी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। ऐसे में कोई घबराने की बात तो नहीं है, लेकिन फिर भी सतर्कता के मद्देनजर स्वार, टांडा, शाहबाद और सदर क्षेत्र के उप जिलाधिकारियों, सभी थानों, बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि बाढ़ के पानी के पास न जाएं। अभी कुछ दिनों तक यही स्थिति रह सकती है।
सीमेंटेड बिजली के खंभे के सहारे आ जा रहे ग्रामीण
रामपुर। कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से आसपास के जंगलों में पानी का बहाव तेज हो गया है। यहां तक कि सैदनगर क्षेत्र के ग्राम पसियापुरा को जाने वाला संपर्क मार्ग भी कट गया है। इससे गांव का संपर्क कट गया है। ऐसे में ग्रामीणों ने अपनी सहूलियत के लिए सीमेंटेड बिजली का खंभा डाल लिया, जिसके सहारे लोग कटे हुए रास्ते को छोड़कर निकल रहे हैं।
ढाई सौ सेंटीमीटर पर बह रही कोसी नदी
रामपुर। कोसी नदी के खतरे का निशान 365 सेंटीमीटर है, जबकि अभी जो पानी बह रहा है वह 250 सेंटीमीटर पर बह रहा है। कोसी नदी में पानी अभी खतरे के निशान से 115 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।