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एसडीएम कोर्ट के फैसलों के बाद हाईकोर्ट में लगाई कैविएट

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रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के गेट तोड़े जाने और जमीन का पट्टा निरस्त किए जाने के संबंधी आदेश एसडीएम के कोर्ट से आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में एहतियातन कैविएट लगा दी गई है। इसके साथ निचली अदालत में भी एक कैविएट दाखिल की गई है। इन दोनों मामलों में एसडीएम कोर्ट का फैसला जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ आया है। उम्मीद है कि इन फैसलों को हाईकोर्ट या निचली अदालत में चुनौती दी जा सकती है। लिहाजा, कैविएट लगाकर यह अपील की गई है कि किसी फैसले से पहले उनकी बात भी सुनी जाए।
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भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना हनी ने मुख्यमंत्री से की थी। उनका आरोप था कि सींगनखेड़ा से लालपुर डैम तक लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड की ओर से सड़क का निर्माण किया गया है। तब 11.5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण पर 17.16 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसमें से साढ़े तीन किलोमीटर सड़क जौहर विश्वविद्यालय के अंदर है। सरकारी धन से सड़क का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण होने के बाद के बाद सार्वजनिक परिसम्पत्ति का सृजन हुआ है। आरोप है कि सींगनखेड़ा की चैनेज पर सड़क पर विश्वविद्यालय की ओर से मुख्य द्वार बनवा दिया गया है, जबकि बंधे की तरफ दीवार का निर्माण करा दिया है। इससे लोग निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस और सार्वजनिक आवागमन बाधित हो गया। विभाग के मुताबिक ऐसा करना अतिक्रमण एवं अनाधिकृत कब्जे की श्रेणी में आता है। इस मामले में लोक निर्माण विभाग नेे एसडीएम कोर्ट में पीपी (पब्लिक प्रेमीसेस) एक्ट के तहत वाद दायर कर दिया था। 25 जुलाई को वाद का फैसला आया। इसमें कहा गया था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को आदेश पारित होने की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर सड़क से गेट हटाकर कब्जा मुक्त करना होगा। वास्तविक वादी को कब्जा देने के आदेश के साथ ही तीन करोड़ 27 लाख 60 हजार रुपये क्षतिपूर्ति भी देने का आदेश दिया।
वहीं, दूसरा मामला ग्राम सींगनखेड़ा का है। यहां काफी जमीन नदी के रेत के रूप में दर्ज थी लेकिन,24 जून 2013 को गर्वनमेंट ग्रांट एक्ट 1895 के तहत जमीन का उपयोग बदलते हुए मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा संयुक्त सचिव नसीर अहमद खां के नाम पट्टा आवंटित कर दिया गया। पट्टे का किराया मात्र 60 रुपये तय किया गया था, जो 30 वर्षों के लिए था। इसको लेकर तहसीलदार सदर ने एसडीएम सदर के न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। इस पर एसडीएम सदर की कोर्ट ने जमीन का पट्टा निरस्त करते हुए मूल स्वरूप यानी रेत में दर्ज करने का आदेश पारित किया है। साथ ही अमल दरामद जारी करने के भी आदेश भी दिए थे। लिहाजा, दोनों ही फैसलों को लेकर प्रशासन को उम्मीद है कि आजम खां की ओर से एसडीएम कोर्ट के फैसले को निचली अदालत एवं हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग की ओर से दोनों ही जगह कैविएट दाखिल कर दी है।
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