जिला पंचायत के चुनावों में बसपा का किला ढह गया। सपा समर्थित 13 प्रत्याशी चुनाव जीत कर आए हैं। पार्टी सूत्रों का दावा है कि चुनाव जीतने वाले कई निर्दलीय प्रत्याशी भी सपा के संपर्क में है। सपा की ओर से कुल 22 सदस्यों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। इस चुनाव में भाजपा को पांच सीटों से संतोष करना पड़ा।
बसपा तो 13 से सिमटकर एक पर आ गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष अब्दुल सलाम अकेले दम पर चुनाव लडे़। उनके लगभग छह समर्थित प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं। कांग्रेस परिदृश्य से गायब है। जिला पंचायत के चुनाव 9, 13, 17 और 29 अक्तूबर को चार चरणों में कराए गए। चुनाव संपन्न होने के बाद रविवार से मतगणना शुरू हुई।
सोमवार को जिला पंचायत के चुनाव परिणाम जारी किए गए। चुनाव परिणाम होने के बाद सबसे अधिक झटका बसपा को लगा है। 2010 के जिला पंचायत चुनाव में बसपा समर्थित प्रत्याशियों की संख्या 13 थी। अब्दुल सलाम निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। इस चुनाव में बसपा सिर्फ एक वार्ड से जीत हासिल कर सकी है।
भाजपा को भी इस चुनाव में काफी उम्मीद थी। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और सांसद डा. नैपाल सिंह ने संयुक्त रूप से 35 में 32 वार्डों से प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। भाजपा के सिर्फ पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत सके हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष अब्दुल सलाम ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा।
कई वार्डों में उन्होंने प्रत्याशी उतारे। सलाम के समर्थन से चुनाव लड़ने वाले छह प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। वार्ड दो से सलाम समर्थित प्रत्याशी लाल सिंह 4500 से अधिक मतों से जीते हैं। कई निर्दलीय प्रत्याशियों ने बेहतर प्रदर्शन कर चुनाव में जीत हासिल की है।