जौहर विश्वविद्यालय के लिए अनुसूचित जाति के लोगों (एससी) की जमीन बिना जिलाधिकारी की अनुमति के सीधे खरीदने के आरोप में मुुकदमा चलाने को लेकर चल रही राजस्व परिषद की सुनवाई पूरी हो गई है। परिषद ने फैसला सुनाते हुए मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश कुमार सक्सेना ने शिकायत की थी कि ग्राम सींगनखेड़ा में अनुसूचित जाति के किसानों की जमीन थी। 2007 में अनुसूचित जाति के लोगों के यह नाम सीलिंग पट्टेदार के रूप में अंकित थे, राजस्व अभिलेखों में संक्रमणीय भूमिधर घोषित नहीं हुए थे। इनकी भूमि की खरीद में नियम विरुद्ध कार्य किया गया। एससी जाति के व्यक्ति के नाम पट्टा होने के कारण सामान्य श्रेणी के विश्वविद्यालय को भूमि नहीं बेची जा सकती थी।
जमीन की खरीद फरोख्त में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 का उल्लंघन किया गया। इस मामले जिलाधिकारी से भी अनुमति नहीं ली गई थी। जमीन से संबंधित पत्रावलियां भी कहीं गुम हो गई हैं। मंडलायुक्त ने जांच के आदेश दिए थे। जांच में मामला संदिग्ध लगा, इस पर मंडलायुक्त ने कार्रवाई के आदेश दिए थे।
इस पर जिलाधिकारी की ओर से राजस्व परिषद में वाद दायर किए गए थे। तब से वाद चलाने योग्य हैं अथवा नहीं, इस बात को लेकर बहस चल रही थी। बोर्ड ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुनाया, जिसमें मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।