रामपुर। मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को 160 एकड़ जमीन खरीदने के मामले में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करना महंगा पड़ सकता है। यह जमीन सरकार में समाहित की जा सकती है। इस मामले में शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से ना तो कोई जवाब दिया गया और ना ही किसी ने पक्ष रखा। एडीएम की कोर्ट ने इस मामले में ट्रस्ट को आखिरी मौका देते हुए सुनवाई की अगली तिथि 14 अगस्त निर्धारित की है।
मोहम्मद आजम खां की अध्यक्षता वाले जौहर ट्रस्ट को 2005 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार केे दौरान कैबिनेट के फैसले के माध्यम से जमीन की खरीद स्टॉप ड्यूटी में छूट दी गई थी। साथ ही किसी भी व्यक्ति या संस्था के लिए जमीन खरीदने की निर्धारित सीमा (12.5 एकड़) से भी मुक्त कर दिया था। ट्रस्ट द्वारा 2005 से लेकर 2019 तक लगभग 160 एकड़ जमीन खरीद की गई है। जमीन की खरीद के लिए यह शर्त थी कि ट्रस्ट की ओर से लोकहित से जुड़े कार्य कराने होंगे। अल्पसंख्यक, गरीब बच्चों की निशुल्क शिक्षा देनी होगी। जिलाधिकारी के प्रत्येक वित्तीय वर्ष का बैलेंस शीट प्रस्तुत करने का प्रावधान किया गया था।
इस मामले में भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि चैरिटी के नाम पर जमीन लेकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। मामले की जांच तत्कालीन एसडीएम (सदर) पीपी तिवारी को सौंपी गई थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ट्रस्ट ने इस जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण कराया, लेकिन पिछले दस सालों में चैरिटी का कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में जौहर ट्रस्ट से 160 एकड़ जमीन वापस ले लिए जाने की संस्तुति की थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर डीएम की कोर्ट में वाद दर्ज कर लिया गया था। बाद में डीएम आन्जनेय कुमार सिंह ने सुनवाई के लिए वाद को एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था। इस मामले में 23 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष से जवाब मांगा गया था। कोर्ट की ओर से पहले आजम खां के घर और बाद में सीतापुर की जेल में नोटिस भेजा गया था, लेकिन उन्होंने नोटिस लेने से मना कर दिया था। स्थानीय समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित कराकर उनसे जवाब देने को कहा गया था। शुक्रवार को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से किसी ने पक्ष नहीं रखा। कोर्ट ने इस मामले में ट्रस्ट को आखिरी मौका देते हुए सुनवाई की अगली तिथि 14 अगस्त तय की है।