तस्करी के बहाने बना पाकिस्तानी एजेंट
शहजाद शुरुआत में गाड़ी चलाता था, लेकिन जल्द ही उसने कॉस्मेटिक्स, मसाले व कपड़ों की तस्करी शुरू कर दी। इसके बाद पाकिस्तान आना-जाना शुरू हुआ और वह आईएसआई एजेंटों के संपर्क में आया। इसके बाद उसने भारत में आईएसआई के लिए भारत में काम करना शुरू किया।
परिवार व संपर्क में आए लोगों से पूछताछ
शहजाद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने टांडा स्थित उसके घर और आसपास के लोगों से पूछताछ की है। कई स्थानीय लोग भी जांच के घेरे में हैं, जिनसे शहजाद का संपर्क रहा है। शक है कि उसने कुछ लोगों को भी इस नेटवर्क में जोड़ा।
आईएसआई एजेंटों को दिलवाए सिम कार्ड
एटीएस जांच में खुलासा हुआ है कि शहजाद ने भारत में रह रहे आईएसआई एजेंटों को फर्जी नाम-पते पर सिम कार्ड दिलवाए और रुपयों की भी व्यवस्था की। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क में रहने के लिए किया जाता था।
तस्करी की आड़ में भेजे लोग
शहजाद ने कई बार भारत के कई हिस्सों से लोगों को तस्करी के बहाने पाकिस्तान भेजा। इन यात्राओं के लिए जरूरी वीजा और दस्तावेज आईएसआई एजेंटों के माध्यम से बनवाए गए। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तानी दूतावास का अधिकारी अहसान उर रहमान उर्फ दानिश भी सक्रिय भूमिका में रहा।