बिलासपुर। भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों ने एआईआईईए के आह्वान पर बीमा में एफडीआई वृद्धि के प्रस्ताव के विरोध में गेट मीटिंग की और कहा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बहुमूल्य संसाधनों को जुटाने और नागरिकों के प्रति राज्य के दायित्व को पूरा करने के प्रयासों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव होंगे।
मंगलवार को दोपहर में भोजनावकाश के बाद सभा को संबोधित करते हुए मंडलीय अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने कहा कि बीमा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलते समय एफडीआई की अधिकतम सीमा 26 प्रतिशत निर्धारित की गई थी लेकिन इसे धीरे-धीरे पढ़कर 74 प्रतिशत किया जा चुका है और अब सरकार विदेशी पूंजी की सभी सीमाएं खत्म करना चाहती है।
कहा कि भारत के बीमा क्षेत्र में विदेशी पूंजी की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सभी निजी बीमा कंपनियां शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गठजोड़ से बड़े-बड़े वित्तीय घरानों द्वारा संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी कभी भी घरेलू बचत का विकल्प नहीं हो सकती है। इसके अतिरिक्त सरकार एक बीमा कानून संशोधन विधेयक की लाना चाहती है जिससे बीमा क्षेत्र में 1956 से पहले की अराज की स्थितियां उत्पन्न हो जाएंगी और लोगों की बचतें जोखिम में पड़ जाएंगी और पूरा बीमा क्षेत्र वित्तीय मगरमच्छों के हवाले हो जाएगा ।
सरकार के इस हानिकारक निर्णय के खिलाफ जनता को लामबंद किया जायेगा। सभा को शाखा अध्यक्ष शिवराज सिंह और मयंक बधानी ने भी संबोधित किया। विरोध प्रदर्शन में प्रभा, मनोज, राजवीर सिंह, नरेश, राजीव कुमार, बृजमोहन सिंह, पंकज गंगवार, मोतीराम, राम सिंह गंगवार, आसिम आदि अभिकर्ता शामिल रहे।