नौवें मोहर्रम पर हर तरफ गम का माहौल छाया रहा। इमामबाड़ों में दास्तान-ए-कर्बला गूंजती रही। जिक्रे हुसैन आया तो आंखें नम हो गईं। अजादारों ने छुरियों और जंजीरों का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। अजाखानों में नोहे पढ़े और चिरागां किया गया। इमामबाड़ा खासबाग में मौलाना ने मजलिस को खिताब किया।
हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी का जिक्र किया। जिक्रे हुसैन सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं। अजादारों ने छुरियों का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। इमामबाड़ा जाकिर हुसैन में भी तारीखी मजलिस हुई। इसके बाद शबीह-ए ताबूत बरामद हुआ। यहां भी अजादारों ने छुरियों और जंजीरी मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।
बैरियान स्थित इमामबाड़ा मंजू साहब में मजलिस और मातम हुआ। लालकब्र में इमामबाड़ा मिर्जा जफर अली बेग, इमामबाड़ा राशिद बेग, इमामबाड़ा साबिर हुसैन में भी मजलिस, चिरागां और मातम हुआ। इमामबाड़ा किला जनाना में अलम मुबारक का जुलूस निकला। या अली या हुसैन, या अली या हुसैन के नारों से माहौल गूंज उठा।
पूरे दिन लंगर तकसीम किया और सबीलें लगाई गईं। ग्रामीण इलाके में भी जलसे हुए। उलमा ने शहीदाने कर्बला का जिक्र किया। हुजूर की सुन्नतों पर अमल करने की ताकीद की। दूसरी ओर से अजादारों ने किला मेहंदी और ताजिये भी खरीदे। गांवों में भी 10 मोहर्रम पर ताजियों का जुलूस निकाला जाएगा।