रामपुर। जिले में न तो खेल प्रतिभाएं कम हैं और न ही हौसले की कमी है। बस उनको तराशने के लिए गुरु और सुविधाओं का अभाव है। शहीद-ए-आजम स्टेडियम में कई खेलों के कोच तक नहीं है।
ऐसे में खिलाड़ी बिना कोच लक्ष्य साध रहे हैं। साथ ही स्टेडियम में फुटबाल, बॉलीबॉल और बैडमिंटन कोर्ट तक नहीं है। कुश्ती के लिए सिंथेनटिक मैट और धावकों के लिए सिंथेनटिक ट्रक तक उपलब्ध नहीं है, जिसकी वजह से खिलाड़ियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शहर में शहीद-ए-आजम स्पोटर्स स्टेडियम है। इस स्टेडियम में एक लंबे समय से कोच का अभाव चल रहा है। कोच के अभाव में खिलाड़ियों को दिशा नहीं मिल पा रही है। मौजूदा समय की अगर बात करें तो अभी तक स्टेडियम में हॉकी के दो कोच है, जिनमें एक संतोष कुमार जो कि उप क्रीड़ा अधिकारी भी है और दूसरे छात्रावास से राजेंद्र सिंह है।
दोनों ही खिलाड़ियों को मनोयोग से हॉकी के गुर सिखाते हंै, लेकिन फुटबाल, क्रिकेट, वॉलीबाल, बैडमिंटन, कु्श्ती और वेट लिफ्टिंग के कोच नहीं हैं। इनमें कुश्ती की अगर बात करें तो यहां पर स्थायी कोच विवेक का ट्रांसफर हो गया। इसके बाद खिलाड़ियों की कुश्ती की प्रेक्टिस छूट गई, जबकि अन्य खेलों में शुरू से ही कोच का अभाव बना हुआ है। ऐसा नहीं कि इन खेलों में खिलाड़़ी नहीं है, मगर कोच को लाना एक टेढ़ी खीर बन गया है। खेल अधिकारियों ने कई बार कोच के लिए निदेशालय से बातचीत की और पत्र व्यवहार भी हुआ, लेकिन कोच नसीब नहीं हो सका। ऐसे में खिलाड़ी खुद को मांझने का प्रयास स्वयं ही कर रहे हैं।